April 21, 2026

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30 मई सोमवार को सुहागिनें सोमवती अमावस्या वट सावित्री पर पीपल और बरगद वृक्ष की लगाएंगे 108 फेरे,

वट सावित्री और सोमवती अमावस्या कल
30 मई सोमवार को सुहागिनें सोमवती अमावस्या वट सावित्री पर पीपल और बरगद वृक्ष की लगाएंगे 108 फेरे,
ज्येष्ठ अमावस्या सोमवार को होने से पर्व का पड़ रहा है सुंदर योग, पर्व की तैयारी को लेकर पूजन सामग्रियों की खरीदारी में जुटी महिलाएं
महुआ, नवनीत कुमार
ज्येष्ठ अमावस्या को सुहागिने वट सावित्री व्रत रख बरगद वृक्ष के 108 फेरे लगाते हैं और पंडित से सावित्री और सत्यवान की कथा श्रवण करती हैं। इसबार इस पर्व का सुंदर योग पड़ रहा है। अमावस्या तिथि सोमवार को पड़ने से वट सावित्री का महत्व काफी बढ़ गया है।
शनिवार को यहां आचार्यो ने बताया कि 30 मई सोमवार को सुहागिन महिलाएं सोमवती अमावस्या के साथ वट सावित्री व्रत का अनुष्ठान रखेंगी। वे इस पर्व पर वट वृक्ष के 108 फेरे लगा कर सावित्री और सत्यवान के साथ शिव पार्वती की कथा श्रवण करेंगी। यह पर्व सुहागिनों के लिए काफी फलदायक माना गया है। बट सावित्री पर पति पूजन का भी महत्त्व है। इस दिन व्रती सुहागिने पति को सेवा कर पंखा झलती है। उन्होंने बताया कि व्रत पर सुहागिने पंडितों को यथासंभव दान देती हैं। इस दिन व्रतियों को सरलता से मधुर वचन बोलनी चाहिए। इस पर्व को लेकर सुहागिनों में खासा उत्साह और उमंग है। पर्व की तैयारी को लेकर वह पूजन सामग्रियों की खरीदारी में लगी हैं। यहां बाजारों में पूजन सामग्रियों की खरीदारी को लेकर सुहागिनों की भारी भीड़ रही। उन्होंने श्रृंगार प्रसाधन से लेकर अन्य सामग्रियों की खरीदारी की। बताया गया कि इस पर पर सुहागिने नए परिधान में सज सबरकर पूजा का अनुष्ठान रखती हैं। यह पर्व सुहागिनों की सौभाग्य की प्राप्ति के लिए उत्तम माना गया है। इस पर्व को करने से वह सदा सुहागन रहती हैं और धन, वैभव, संतान की प्राप्ति होती है। बताया गया कि इसी दिन सावित्री ने अपने पति सत्यवान का जीवन अपनी भक्ति और शक्ति से लौटबाई थी।
वट सावित्री और सोमवती अमावस्या का वैज्ञानिक महत्व:
ज्येष्ठ अमावस्या और पूर्णिमा को सुहागिने वट सावित्री का व्रत रख उस बरगद और पीपल वृक्ष के 108 फेरे लगाती हैं जो छाया प्रदान करती है। यह महीना काफी तपिश भरा होता है। उमस और गर्मी से लोग बेहाल रहते हैं। मानव जीवन में छांव देने वाले वृक्ष का क्या महत्व है। जीवनदायिनी ऑक्सीजन की प्राप्ति इसी वृक्षों से होती है। वैज्ञानिकों की मानें तो बरगद और पीपल ऑक्सीजनदायी होते हैं। सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की प्राप्ति इन्हीं वृक्षों से होती है। इस तपिश भरी ज्येष्ठ महीने में छांव के साथ ऑक्सीजन प्रदान करने वाले दोनों वृक्षों का पूजन कर महिलाएं लोगों को उसे बचाने का संदेश देती हैं। वृक्ष मानव जीवन के लिए कितना जरूरी है। यह इस पर्व के माध्यम से पहचान होती है। सुहागिन महिलाएं अपने बाल में बरगद के पत्ते को लगाकर पूजन करती है। ताकि इसकी छांव और ऑक्सीजन हर मानव को युग-युग तक मिलती रहे।

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