March 10, 2026

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ब्लड ट्रांसफ्यूजन के द्वारा 90 प्रतिशत मातृ मृत्युदर को रोका जा सकता है: सिविल सर्जन /रिपोर्ट नसीम रब्बानी

ब्लड ट्रांसफ्यूजन के द्वारा 90 प्रतिशत मातृ मृत्युदर को रोका जा सकता है: सिविल सर्जन /रिपोर्ट नसीम रब्बानी

– आधे घंटे के भीतर शुरु करें ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन

– ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन मातृ मृत्युदर रोकने में सहायक

वैशाली। 2 अगस्त
प्रसव के दौरान मातृ मृत्यु दर का मुख्य कारण रक्त की कमी होना है। अगर प्रसूता को सही समय पर सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जाय तो उसकी जान बच सकती है। ये बातें सिविल सर्जन प्रमोद कुमार सिंह ने सोमवार को जिला स्वास्थ्य समिति में ब्लड ट्रांसफ्यूजन पर चल रहे एक दिवसीय प्रशिक्षण में कही। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्युदर में 38 प्रतिशत मौत अत्यधिक रक्तस्राव के कारण होती है। इसमें भी ब्लड ट्रांसफ्यूजन के द्वारा 90 प्रतिशत माताओं की जान बचायी जा सकती है। मालूम हो कि जिला स्वास्थ्य समिति के सभागार में जिला अस्पताल के 32 जीएनएम का ब्लड ट्रांसफ्यूजन द्वारा प्रसूति संबंधी रक्तस्राव के प्रबंधन पर एकदिवसीय प्रशिक्षण हुआ है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन  पर इसी तरह का प्रशिक्षण महुआ सदर अस्पताल में भी होगा जिसमें 28 एएनएम और जीएनएम को प्रशिक्षण मिलेगा। इस प्रशिक्षण को केयर के टेक्निकल ट्रेनर के लीना एवं श्वेता ने दिया।

सुरक्षित प्रबंधन पर मिला प्रशिक्षण
ट्रेनर लीना एवं श्वेता ने बताया कि ब्लड ट्रांसफ्यूजन तब किया जाता है जब स्वस्थ्य व्यक्ति के शरीर से 25 प्रतिशत या अधिक मात्रा में रक्त की हानि हो जाती है। अधिक रक्तस्राव के कारण महिला को हीमोरेजिक शॉक हो सकते हैं। वहीं अनीमिया ग्रस्त गर्भवती महिलाओं और प्री-एक्लेमप्सिया की स्थिति वाली महिलाओं में कम मात्रा में रक्त हानि होने पर भी ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है। वहीं सी सेक्सन सर्जरी में भी ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता होती है। ट्रेनर लीना एवं श्वेता के द्वारा ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन के पूर्व की तैयारी के संबंध में बताया कि रोगी की सही पहचान होने के बाद ब्लड बैग लेबल पर लिखित जानकारी जेसे ब्लड बैग नंबर, रक्त समूह, रक्त की जांच रिपोर्ट को केस शीट पर दर्ज कर लेना चाहिए।

आधे घंटे के अंदर हो ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन
लीना ने बताया कि ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन रेफ्रिजरेटर से निकालने के आधे घंटे के भीतर शुरु हो जाना चाहिए क्योंकि रक्त का तापमान बढ़ने से जीवाणुओं के संक्रमण तथा हेमोलीसिस का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए ब्लड स्टोरेज यूनिट से उसी समय वार्ड,लेबर रुम या ऑपरेशन थियेटर में लाना चाहिए जब ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन करना हो।

निगरानी भी आवश्यक
श्वेता ने कहा कि ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन के दौरान निगरानी नियमित तौर पर होना चाहिए। यदि रोगी को खुजली, बुखार, सांस लेने में कठिनाई हो तो तुरंत रोक दें। वहीं ब्ल्ड ट्रांसफ्यूजन की प्रक्रिया को 4 घंटे के भीतर पूरी कर लेनी चाहिए। मौके पर केयर डीटीएल सुमित कुमार, डीटीओ ऑन कृतिका पांडेय, ट्रेनर लीना एवं श्वेता समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मी उपस्थित थे।

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