November 27, 2025

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स्व0 कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान ने पिछले एक वर्ष में ही 750 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं।

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स्व0 कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान ने पिछले एक वर्ष में ही 750 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं।

रिपोर्ट:नसीम रब्बानी, बीहार

हाजीपुर के शुक्ला सभागार में बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत 100 दिन के विशेष कार्यक्रम का उद्घाटन डीपीओ वैशाली प्रतिभा कुमारी गिरी, सहायक निदेशक जिला बाल संरक्षण इकाई वैशाली विनोद कुमार ठाकुर, सेंटर एडमिनिस्ट्रेटर महिला हेल्पलाइन प्रियंका कुमारी , बाल कल्याण पदाधिकारी अमूल्य कुमार, डीपीएम महिला विकास निगम जुलेखा एवं स्वर्गीय कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान के सचिव सुधीर कुमार शुक्ला ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर उपस्थित पदाधिकारी ने बाल विवाह हेतु सामूहिक कार्यक्रम बनाने पर चर्चा की तथा 100 दिन के कार्यक्रम एवं इसके रूपरेखा तैयार करने पर विस्तार पूर्वक चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि यह एक सामूहिक प्रयास का कार्यक्रम है । जिसे सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाएं मिलकर जड़ से खत्म कर सकते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न विभाग के पदाधिकारी ने विस्तार पूर्वक जानकारी दी। इस अवसर पर शपथ कार्यक्रम का आयोजन किया गया तथा लोगों को शपथ दिलाई गई। गैरसरकारी संगठन स्व0 कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान के सचिव सुधीर कुमार शुक्ला ने कहा कि वह वैशाली/ बक्सर/ सिवान  को साल भर के भीतर बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करेगा। ‘100 दिवसीय गहन जागरूकता अभियान’ जिसे बाल विवाह मुक्त भारत के एक वर्ष पूरे होने के मौके पर पूरे देश में शुरू किया गया है, ने एक लक्षित रणनीति तय की है। इसमें स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों, उन धार्मिक स्थलों जहां विवाह संपन्न कराए जाते हैं, विवाह में सेवाएं देने वाले पेशेवर सेवा प्रदाताओं, और आखिर में पंचायतों व नगरपालिका वार्डों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि बच्चों के खिलाफ इस सदियों पुराने अपराध का अंत सुनिश्चित किया जा सके। स्व0 कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान देश में बाल अधिकारों के संरक्षण के लिए नागरिक समाज संगठनों के देश के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। इसके 250 से भी अधिक सहयोगी संगठन देश के 451 जिलों में बाल विवाह के खात्मे के लिए जमीन पर काम कर रहे हैं। पिछले एक वर्ष में ही इस नेटवर्क ने देश में एक लाख से ज्यादा बाल विवाह रोके हैं। ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के 27 नवंबर को एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर स्व0 कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान ने स्कूलों, ग्रामीण समुदायों और अन्य संस्थानों में जागरूकता कार्यक्रम और तीनों जिलों (वैशाली, बक्सर और सिवान) में जगह-जगह बाल विवाह के खिलाफ शपथ समारोह आयोजित किए। संगठन ने जनसमुदाय को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के प्रावधानों के बारे में भी जागरूक किया और उन्हें समझाया कि कानून के अनुसार बाल विवाह में किसी भी तरह से शामिल होने या सहायता करने वालों जिसमें शादी में आए मेहमान, कैटरर्स, टेंट वाले, बैंड वाले, सजावट वाले या बाल विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहित, सभी को इस अपराध को बढ़ावा देने के जुर्म में सजा हो सकती है। पिछले कुछ वर्षों से कानून लागू करने वाली एजेंसियों व जिला प्रशासन के साथ करीबी समन्वय से काम करते हुए स्व0 कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान ने पिछले एक वर्ष में ही 750 से अधिक बाल विवाह रुकवाए हैं। बाल विवाह के खिलाफ जारी  अभियान को और गति व मजबूती देने वाली सरकार की इस घोषणा का स्वागत करते हुए स्व० कन्हाई शुक्ला सामाजिक सेवा संस्थान के सचिव सुधीर कुमार शुक्ला ने कहा, “यह 100 दिवसीय गहन अभियान देश की दिशा बदलने वाला साबित होगा और
हमें प्रधानमंत्री के विकसित भारत के लक्ष्य के करीब लाएगा। सदियों से हमारी बेटियों को अवसरों से वंचित किया गया है और विवाह के नाम पर उन्हें अत्याचार, शोषण और बलात्कार की ओर धकेला गया है। जन प्रतिनिधियों, सरकारी विभागों, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और समुदायों का अभूतपूर्व तरीके से एक साथ आना, बाल विवाह के खात्मे के लिए भारत सरकार की प्रतिबद्धता और प्रयासों को नई ऊर्जा व रफ्तार देगा। इस समन्वय और सामूहिक संकल्प से हम जिले को साल भर के भीतर बाल विवाह मुक्त बनाने के प्रति आश्वस्त हैं और अब इस अपराध को छिपने के लिए कहीं भी जगह नहीं मिलेगी।” सौ दिन के इस गहन जागरूकता अभियान को तीन चरणों में बांटा गया है और इसका आखिरी चरण 8 मार्च 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर समाप्त होगा। इसका पहला चरण 31 दिसंबर तक चलेगा जिसमें स्कूलों, कालेजों और अन्य शिक्षण संस्थानों में  जागरूकता के प्रसार पर जोर रहेगा। एक जनवरी से 31 जनवरी के बीच दूसरे चरण में मंदिर, मस्जिद, चर्च और गुरुद्वारे जैसे धार्मिक स्थलों पर जहां विवाह संपन्न कराए जाते हैं, बैंक्वेट हाल, और बैंड वालों जैसे विवाह में सेवाएं देने वालों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। तीसरा और आखिरी चरण 8 मार्च तक चलेगा। इसमें बाल विवाह की रोकथाम के लिए ग्राम पंचायतों, नगरपालिका के वार्डों और समुदाय स्तरीय भागीदारी पर प्रमुखता से ध्यान दिया जाएगा।

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