विभूतिपुर में स्मृतिशेष रामशंकर सिंह की प्रथम पुण्य तिथि पर काव्य गोष्ठी का आयोजन
विभूतिपुर में स्मृतिशेष रामशंकर सिंह की प्रथम पुण्य तिथि पर काव्य गोष्ठी का आयोजन
रिपोर्ट:आशुतोष कुमार सिंह, समस्तीपुर
विभूतिपुर, समस्तीपुर। प्रखंड के समर्था ग्राम निवासी स्मृतिशेष रामशंकर सिंह, शिक्षक की प्रथम पुण्य तिथि के अवसर पर उनके पुत्रजनों द्वारा एक काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिले के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार चांद मुसाफिर ने कहा कि समाज में उत्कृष्ट काम करने वालों को प्रोत्साहित करने और अपने कर्म से आदर्श स्थापित करने को इस तरह से याद करना सर्वोच्च कृष्ट कार्य है।
इस काव्य गोष्ठी की अध्यक्षता चांद मुसाफिर ने की, जिसमें क्षेत्र के प्रसिद्ध साहित्यकार एवं कवि-गण उपस्थित हुए। पंडित राज किशोर झा के स्वस्तिवाचन श्लोक से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। वक्ताओं ने गुरू शिष्य परंपरा के तहत गुरू की महिमा पर प्रकाश डाला और अपने-अपने संस्मरण सुनाए।
चांद मुसाफिर ने कहा, “मंजिलें पाना आसान तो नहीं होती लेकिन प्राप्त करना मुश्किल भी नहीं है।” कवि राम विलास प्रवासी ने अपनी कविता पाठ किया, जबकि कवि व शिक्षक राजाराम महतो ने कहा, “हरियाली हो चहुं दिशि, बाग में खिला हर्ष हो, नवीन खुशियों से लबालब, प्यार नव वर्ष हो।”
प्रोफेसर शशि भूषण चौधरी ने अपने सारगर्भित भाव व्यक्त किए, “अंतर्मन के भाव निरंतर, उठ उठ कर रह जाते हैं। कुछ रोने को कुछ गाने को, रह रहकर अकुलाते हैं।” रमाकांत सिंह की गुरू के प्रति कविता ने पौराणिक काल के गुरु के प्रति शिष्य की श्रद्धा को याद दिलाया।
इस अवसर पर गायक संतोष कुमार सुमन ने गुरू के चरणों में अपने भाव को अर्पित किया। अवकाशप्राप्त प्रधान अध्यापक मदन मोहन पाठक जी ने गुरु के प्रति अपने दो शब्दों से श्रोताओं को लाभान्वित किया।
काव्य गोष्ठी के अंत में धन्यवाद ज्ञापन रवीन्द्र कुमार सिंह (पुत्र) ने किया। इस अवसर पर दूर-दूर से आए साहित्यकार, कवि व शिक्षकों जनों को परिवार की ओर से चादर ओढाकर सम्मानित किया गया। अंत में प्रीति भोज का आयोजन हुआ।
इस अवसर पर अवकाश प्राप्त है शिक्षक यशवंत कुमार सिंह नवीन कुमार सिंह विनय कुमार मुरारी आशुतोष कुमार सिंह पुत्र अमलेन्दु वत्स (पौत्र), शिवेशवर ठाकुर, वीरेंद्र कुमार सिंह, वाल्मीकि सिंह आदि उपस्थित थे।
