वट सावित्री पर सुहागिनों ने बरगद वृक्ष के लगाए फेरे
सावित्री सत्यवान के साथ शिव पार्वती की अमर कथा सुनकर सदा सुहागन रहने की मांगी मन्नत, सुहागिनों ने सोलहो श्रृंगार कर रखी व्रत का अनुष्ठान
महुआ। रेणु सिंह
ज्येष्ठ मास की अमावस्या और वट सावित्री व्रत को लेकर शनिवार को सुहागिनों ने बरगद वृक्ष के फेरे लगाए और सावित्री सत्यवान के साथ शिव पार्वती की अमर कथा सुनकर सदा सुहागन रहने की मन्नत मांगी। व्रत को लेकर सुहागिनों में खासा उत्साह रहा। वे सोलहों श्रृंगार में सवरकर धार्मिक स्थल पहुंची और वट वृक्ष के फेरे लगाए। व्रत को लेकर सुहागिने अहले सुबह से ही नहा धोकर और सोलहो श्रृंगार में सज सवरकर धार्मिक स्थल के बरगद वृक्ष के पास पहुंचने लगी। जहां पर उन्होंने वृक्ष की पूजन कर उसके अपने शक्ति के अनुसार 108 या 51 फेरे लगाए। महुआ के पुराना बाजार स्थित ब्रह्मस्थान, कालीघाट, महावीर मंदिर, अनुमंडल कार्यालय द्वार, फुलवरिया काली स्थल, कढनिया, पहाड़पुर, गोरीगामा, कड़ियों, नारायणपुर, सरसई, मुकुंदपुर, डुमरी, पताढ, हरपुर, कुशहर, मकसूदपुर, अब्दुलपुर, सेहान, गंगटी, मधौल, कन्हौली आदि स्थानों के धार्मिक स्थल स्थित बरगद वृक्ष के पास सुहागिनों की भीड़ रही। सुहागिनों ने बट वृक्ष के फेरे लगाने के बाद पुरोहित से सावित्री सत्यवान के साथ भगवान शिव और पार्वती की अमर सुहाग की कथा सुनी। पंडितों को उचित दान दिए। बताया गया कि यह व्रत सुहागिनों के लिए अति फलदाई है। इसी दिन सावित्री ने अपने मृत पति सत्यवान को जीवनदान दिलाई थी। खासकर शनि जयंती होने को लेकर यह व्रत का महत्व और बढ़ गया। बताया जाता है कि बरगद वृक्ष के जड़ में भगवान ब्रह्मा, तना में श्रीहरि विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास होता है। इस व्रत को करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। वहीं पर्यावरण विद बताते हैं कि वृक्ष पूजन से पर्यावरण को बचाने का बोध होता है। इस महीने जब तेज धूप के साथ गर्मी पड़ती है तो पेड़ पौधे की छांव के महत्व का पता चलता है। बरगद और पीपल सबसे अधिक ठंडक और ऑक्सीजन प्रदान करने वाले वृक्ष होते हैं।