जन सुराज के पार्टी निर्माण से पूर्व ही बिहार की सबसे बड़ी पार्टी राजद सहमी।
जन सुराज के पार्टी निर्माण से पूर्व ही बिहार की सबसे बड़ी पार्टी राजद सहमी।
रिपोर्ट सुधीर मालाकार ।
वैशाली (हाजीपुर) 2025 के विधानसभा चुनाव में पुनः बिहार में सत्ता वापसी की मंसूबा पाल रखी राष्ट्रीय जनता दल को अपनी जमीन खिसकती नजर आ रही है। आखिर राजद में खलबली व बेचैनी बढ़े तो क्यों नहीं ,जन सुराज के सूत्रधार पदयात्रा के नायक प्रशांत किशोर की बढ़ती लोकप्रियता ने बिहार की सियासत में खलबली बचा कर रख दिया ।जबकि जन सूरज एक संगठन है न कि एक राजनीतिक दल। दल का निर्माण तो 2 अक्टूबर 2024 को होगी लेकिन उससे पूर्व ही बिहार के सभी दलों में जबरदस्त खलबली नजर आ रही है ।भले ही कुछ लोग ऊपर से कहते हो,जन सूरज से कुछ बनने बिगड़ने वाला नहीं है लेकिन अंदर ही अंदर डर और बेचैनी महसूस की जा सकती है ।अगर ऐसी बात नहीं होती तो बिहार की सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह को अपने कार्यकर्ताओं के चेतावनी भरे पत्र लिखने नहीं पड़ते ।जगदानंद सिंह की पत्र ने साफ जाहिर कर दिया है कि राजद जन सुराज की बढ़ती लोकप्रियता और जन सैलाब से कहीं ना कही डरी व सहमी है। अपने पत्र में राजद प्रदेश अध्यक्ष ने जन सुराज को भाजपा के बी टीम कहते हुए उससे बचने और उसमें भाग लेने से मना किया है ।लोग कहते हैं की जातीय समीकरण के तोड़ प्रशांत किशोर के पास नहीं है, लेकिन वैसे लोगों को शायद पता नहीं की प्रशांत किशोर राजनीतिक रणनीति का है। उन्होंने पहले ही कर्पूरी ठाकुर के जयंती पर घोषणा कर दिया कि 243 सीट पर चुनाव लड़ेंगे और जिसमें 75 सेट अति पिछड़ा को लड़ाएंगे,जबकि महिलाओं को उन्हें भी हम उचित सम्मान देते हुए उनकी भागीदारी सुनिश्चित करेंगे। सभी जाति, धर्म के लोग को एक साथ लेकर चलने की जब महत्वाकांक्षा जन सुराज ने पाल रखी है ,जिससे अन्य राजनीतिक दलों में बेचैनी व घबराहट स्पष्ट दिखती है।
