भारतीय मजदूर संघ जिला इकाई समस्तीपुर द्वारा पर्यावरण दिवस मनाया गया
भारतीय मजदूर संघ जिला इकाई समस्तीपुर द्वारा पर्यावरण दिवस मनाया गया
समस्तीपुर भारत माता की जय वंदे मातरम बीएमएस अमर रहे अमर रहे राष्ट्र के हित में करेंगे काम काम का लेंगे पूरे दाम कौन बनाता हिंदुस्तान भारत का मजदूर किसान जैसे नारों के साथ भारतीय मजदूर संघ जिला मंत्री पंकज करण के रोसरा स्थित निवास स्थान परिसर में भारतीय मजदूर संघ जिला इकाई समस्तीपुर द्वारा पर्यावरण दिवस मनाया गया जिसका संचालन जिला मंत्री पंकज करण द्वारा किया गया तथा कार्यकरता द्वारा विभिन्न प्रकार के पौधारोपण किया गया जिसमें अशोक का पौधा पीपल का पौधा नीम का पौधा कैनेल का फूल का पौधा गूलर का फूल का पौधा विभिन्न जगह पर लगाया गया मौके पर उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उत्तर बिहार प्रांत संपर्क प्रमुख विजय कुमार सिंह का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ एवं भारतीय मजदूर संघ प्रदेश उपाध्यक्ष रामबाबू सिंह ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अपने संबोधन में कहा कि 28 अगस्त को भारतीय मजदूर संघ द्वारा पर्यावरण दिवस क्यों मनाया जाता है पर प्रकाश डालते हुए कहा भारत के ऋषि मुनियों ने प्राचीन काल से ही पर्यावरण की चिंता की है भारतवासी नदी तालाब कुआ नीम पीपल बर्गर आमला आम अशोक व अर्जुन तथा तुलसी पौधे को पूजनीय और बंदनीय मानते आए हैं प्रत्येक वृक्ष की पूजा अर्चना के लिए दिन भी निश्चित है हमारा प्राकृतिक प्रेम जग जाहिर है पश्चिम के उपभोक्तावादी व भोगवादी संस्कृति ने अपना वर्चस्व स्थापित कर लिया है विज्ञान और औद्योगिक प्रगति ने तो जनजीवन को बिल्कुल परिवर्तित कर दिया है जिसके परिणाम स्वरुप मानव का जीवन यंतवत हो गया है संपूर्ण वातावरण में प्रदूषण फैल चुका है पश्चिम के लोगों ने यह विचार ही नहीं किया की प्रकृति का अत्यधिक दोहन मानव के लिए खतरा बन भी जाएगा बढ़ते प्रदूषण के कारण अब उन्हें चिंता सताने लगी है विश्व में पर्यावरण की समस्याओं पर विचार करने के लिए स्टॉक होम में 5 जून 1972 को संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में एक सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें अनेक देशों के पर्यावरणविद् उपस्थित हुए 12 दिसंबर 1972 को संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में प्रस्ताव पास कर या निश्चय किया गया की 5 जून जिस दिन पर्यावरण पर विचारण विचारार्थ महासम्मेलन बुलाया गया वही दिन विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाए हमारे पूर्वजों ने पर्यावरण की रक्षा की और बहुत पहले से ही ध्यान दिया था इस संदर्भ में बिशनौई समाज के प्रवर्तक गुरु जनेस्वर के प्रयास उल्लेखनीय हैं जोधपुर से 25 किलोमीटर दूर खेजड़ी गांव के पास खेजड़ी वृक्षों का विशाल धनाजंगल है एक बार जोधपुर के राजा के आदेश पर उनके कर्मचारी खेजड़ी वृक्षों को काटने आए थे पेड़ को काटते देखकर वीरांगना अमृता देवी ने 28 अगस्त 1730 को खेजड़ी का पेड़ काटने के विरोध में पेड़ से चिपक कर यह कहते हुए की सिर शांटे रुख रहे तो भी ससतो जान कह कर अपना शीश कटवाया था मां का अनुसरण उनकी दो बेटियों ने भी किया और इस प्रकार 69 महिलाओं सहित 363 लोगों ने वृक्षों को बचाते हुए बलिदान दिया था इस हृदय विदारक घटना की जानकारी जब- जोधपुर के राजा को मिली तो वह वहां आकर जनता से माफी मांगी और राजा राज्यज्ञा निकाली की अब इस वन में पेड़ कटाई और पशु वध दंडनीय अपराध होगा यह घटना यह दर्शाती है कि हमारे पूर्वजों ने पर्यावरण की रक्षा हेतु अपना बलिदान देने में भी नहीं हिचके 5 जून को पर्यावरण पर स्टॉक होम मैं हुई बैठक की स्मृति में भारत वर्ष में पर्यावरण दिवस मनाया जाना तरसंगत नहीं है पर्यावरण की रक्षा हेतु प्राण देने वाली वीरांगना अमृता देवी की स्मृति में 28 अगस्त को पर्यावरण दिवस के रूप में मनाने का भारतीय मजदूर संघ ने स्वीकार किया भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में पर्यावरण मंच की स्थापना हुई इसलिए भारतीय मजदूर संघ 28 अगस्त को पर्यावरण दिवस के रूप में मनाता है पौधारोपण कार्यक्रम में मौके पर अमृता देवी कुमारी ममता गीता देवी अर्चना देवी प्रमिला देवी अमृता भारती देवलक्ष्मी पूजा देवी पिंकी देवी कोमल कुमारी रिंकी कुमारी किरण कुमारी गुंजा कुमारी पल्लवी कुमारी आंचल कुमारी संगम कुमारी दिव्या कुमारी लक्ष्मी कुमारी शिल्पी कुमारी प्रणवराज पवन करण रामप्रवेश महतो संदीप महतो कामेश्वर प्रसाद सिंह प्रतिक राज आदि उपस्थित थे
