April 23, 2026

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महादलित टोलों के साथ स्कूली बच्चों को एईएस/जेई से बचाव हेतु सचेत कर रहीं है आशा संजू कुमारी

महादलित टोलों के साथ स्कूली बच्चों को एईएस/जेई से बचाव हेतु सचेत कर रहीं है आशा संजू कुमारी

– महादलित टोलों में घर घर जाकर, चौपाल लगाकर लोगों को कर रहीं है जागरूक
– कड़े धुप में न जाने और बच्चों को रात में खाली पेट न सोने का देती है नसीहत

मोतिहारी। 08 अप्रैल
एईएस/जेई से प्रभावित प्रखंडो में बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग काफ़ी गंभीर है। इसी को देखते हुए एईएस जेई के लक्षण बताते हुए इससे बचाव हेतु चौपाल लगाकर घर-घर जनसंपर्क करते हुए आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व अन्य स्वास्थ्य कर्मियों के द्वारा जनसमुदाय को जागरूक किया जा रहा है ताकि एईएस जेई के मामलों में वृद्धि न हो, वहीं विधालय में बच्चों को समझाने के लिए शिक्षकों का भी सहयोग लिया जा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र आदापुर के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय गम्हरिया खुर्द अनुसूचित जाति टोला के प्रांगण में संजू कुमारी आशा के द्वारा शिक्षकों की मौजूदगी में एईएस जेई के लक्षण, बचाव एवं उपचार के संबंध में विस्तार पूर्वक जानकारी दी गईं। आशा संजू प्रतिदिन 40 से ज्यादा घरों में जाकर लोगों को एकत्रित कर शाम में चौपाल लगाकर चमकी बुखार से बचाव के बारे में महिलाओं, बुजुर्गो, बच्चों को लीफलेट देते जागरूक करती है, बच्चों को कड़ी धुप में नहीं निकलने, कच्चे-अधपके फलों का सेवन नहीं करने, रात में खाली पेट न सोने देने, रात में हल्का मीठा खिलाने की बातें बताई जा रहीं है। वहीं आशा ने कहा की गाँव में किसी को बुखार लगे तो तुरंत मुझसे सम्पर्क करें। इस बात का ध्यान रखना है की ईलाज में देरी नहीं होनी चाहिए। आशा ने कहा की ओआरएस एवं पारासिटामोल रखती हूँ एवं वितरण करती हुँ।
ताकि इस उमस भरे मौसम में चमकी के मामलों से बच्चे सुरक्षित रहें।आशा संजू बच्चों और उनके अभिभावकों को चमकी को धमकी देने के लिए प्रमुखता से तीन महत्वपूर्ण बातें बता रही है जिनमे बच्चों को कड़ी धूप में न निकलने, रात में बच्चों को भूखे पेट न सोने, कुछ मीठा खिलाए, ताजे भोजन, मौसमी फल खिलाए, ओआरएस के घोल का सेवन फायदेमंद है। आशा संजू ने विधालय के शिक्षकों को समझाते हुए कहा की चमकी में भूलकर भी देरी न हो। तेज बुखार, जकड़न, चक्कर, बेहोशी, मुंह से झाग जैसे लक्षण दिखे तो तुरंत सरकारी अस्पताल में एम्बुलेंस या निजी वाहन से इलाज के लिए बच्चों को सरकारी अस्पताल लाए और एंबुझाड-फूंक से बचें।
बच्चों को पानी खुब पिलाए, घरों के आसपास साफ सफाई जरूर करें। घर की खिड़की व दरवाजा बंद नहीं करें, हवादार रहने दें।

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