January 16, 2026

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पसमांदा आंदोलन को मिला नया जोश, इरफान अली जामियावाला और धड़क कामगार सेना अध्यक्ष की अहम बैठक

पसमांदा आंदोलन को मिला नया जोश, इरफान अली जामियावाला और धड़क कामगार सेना अध्यक्ष की अहम बैठक

मुंबई, पसमांदा मुसलमानों की आवाज़ और समाज सुधार आंदोलन के प्रमुख चेहरा इरफान अली जामियावाला की महाराष्ट्र के मज़दूर संगठन धड़क कामगार सेना के अध्यक्ष से एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में बिहार और महाराष्ट्र के आगामी चुनाव, पसमांदा समाज के अधिकार और संविधान के अनुच्छेद 341(1) पर गहराई से चर्चा हुई।

बैठक का प्रमुख फोकस रहा कि किस तरह दलित मुसलमानों और पिछड़े वर्ग के मुसलमानों को राजनैतिक मुख्यधारा में उचित प्रतिनिधित्व दिलाया जाए। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि बिहार और महाराष्ट्र में पसमांदा समाज को सिर्फ वोट बैंक की तरह नहीं देखा जाएगा, बल्कि उनके सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक हक़ों की लड़ाई मजबूती से लड़ी जाएगी।

संविधान के अनुच्छेद 341(1) पर भी चर्चा

बैठक के दौरान इरफान अली जामियावाला ने साफ शब्दों में कहा कि अनुच्छेद 341(1) की वजह से दलित मुसलमानों और ईसाइयों को अनुसूचित जाति (SC) आरक्षण से वंचित किया गया है, जो पूरी तरह संवैधानिक अन्याय है। उन्होंने बताया कि किस तरह पसमांदा समाज के लोग सदियों से भेदभाव और जातीय उत्पीड़न झेलते आ रहे हैं और अब वक्त आ गया है कि वे अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए खुलकर मैदान में उतरें।

साझा रणनीति का एलान

धड़क कामगार सेना के अध्यक्ष ने भरोसा दिलाया कि मज़दूर वर्ग और पसमांदा समाज के मुद्दों को जोड़कर एक सशक्त सामाजिक आंदोलन खड़ा किया जाएगा। बिहार और महाराष्ट्र में पसमांदा समाज के सवाल को चुनावी मुद्दा बनाया जाएगा और राजनैतिक दलों पर दबाव बनाया जाएगा कि वे अपने घोषणापत्र में पसमांदा समाज के लिए ठोस योजनाओं की गारंटी दें।

बैठक में इस बात पर भी चर्चा हुई कि आने वाले समय में पसमांदा समाज के युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट, शिक्षा, और स्वावलंबन योजना की मांग भी उठाई जाएगी।

इरफान जामियावाला का बयान:

> “अब समय आ गया है कि पसमांदा समाज के लोग भी अपने अधिकार और सम्मान की लड़ाई में आगे आएँ। जातीय गुलामी खत्म हो और संविधान में जो हक़ छीने गए हैं, उन्हें वापस लिया जाए।”

अगले कदम:

बैठक के बाद यह तय हुआ कि जल्द ही मुंबई, पटना और औरंगाबाद में पसमांदा जागरूकता सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा और अनुच्छेद 341 के खिलाफ एक राष्ट्रीय स्तर पर जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

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