दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में बिहार के अमर ज्योति झा को मिला बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट एक्टर अवॉर्ड
दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में बिहार के अमर ज्योति झा को मिला बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट एक्टर अवॉर्ड
नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्म निर्माता-निर्देशक एवं अभिनेता अमर ज्योति झा की फिल्म रीबर्थ (पुनर्जन्म) के लिए सम्मानित किया गया। फिल्म रीबर्थ (पुनर्जन्म) ने इस फेस्टिवल में बड़ी उपलब्धि हासिल की। फिल्म के लिए अमर ज्योति झा को बेस्ट डायरेक्टर और बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड प्रदान किया गया, जबकि बेस्ट सिनेमैटोग्राफी के लिए रंजीत के सिंह को सम्मानित किया गया। यह उपलब्धि न सिर्फ फिल्म की गुणवत्ता को दर्शाती है बल्कि बिहार की रचनात्मक प्रतिभा की ताकत को भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करती है।
फिल्म रीबर्थ (पुनर्जन्म) को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी पहचान मिल रही है। यह फिल्म ऑस्कर अवॉर्ड क्वालीफाइंग फिल्म फेस्टिवल, अमेरिका में चयन और स्क्रीनिंग के साथ अवॉर्ड के लिए भी नामांकित हो चुकी है। अब तक देश-विदेश में इस फिल्म को 50 से अधिक अवॉर्ड मिल चुके हैं। फिल्म के मुख्य सहायक निर्देशक विकास बच्चन और प्रोडक्शन मैनेजर संजय साह हैं, जबकि इस फिल्म की खास बात यह है कि इसके सभी कलाकार और टेक्नीशियन बिहार से जुड़े हैं। फिल्म की शूटिंग बिहार के विभिन्न स्थानों के साथ वाराणसी के प्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर की गई है।
अमर ज्योति झा को बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड द्वारा प्रमुख वक्ता के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है। अमर ज्योति झा ने बिहार सरकार एवं बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम लिमिटेड के सहयोग से राज्य में फिल्म निर्माण के लिए बन रहे अनुकूल माहौल की सराहना करते हुए कहा कि बिहार में सिनेमा के क्षेत्र में चहुंमुखी विकास की अपार संभावनाएं हैं। उनकी यह उपलब्धि बिहार की प्रतिभा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
आपको बता दें कि नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित दादा साहेब फाल्के फिल्म फेस्टिवल का सफल आयोजन अमोल भगत जी के द्वारा किया गया, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों से जुड़े कलाकार, फिल्म समीक्षक और टेक्नीशियन की उल्लेखनीय भागीदारी रही। इस मंच पर भारतीय सिनेमा से जुड़े कई महत्वपूर्ण रचनात्मक व्यक्तित्वों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और सिनेमा के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश देने पर बल दिया गया।
