महुआ महोत्सव के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम, माही जैन के सुर और राज सोनी की कॉमेडी ने लूटी महफिल
महुआ महोत्सव के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम, माही जैन के सुर और राज सोनी की कॉमेडी ने लूटी महफिल
_रिपोर्ट: सुधीर मालाकार_
महुआ (वैशाली) — दो दिवसीय ‘महुआ महोत्सव’ के अंतिम दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों की जबरदस्त धूम रही। लोकगीत, लोकनृत्य, भजन और आधुनिक गीत-संगीत की प्रस्तुतियों ने पूरे गांधी मैदान को उत्सवमय बना दिया। देर रात तक तालियों की गूंज से परिसर सराबोर रहा।
महुआ अनुमंडल क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों के बच्चों ने एक से बढ़कर एक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। प्रधानाध्यापक अजीत कुमार पप्पू, अंतरराष्ट्रीय कवि प्रीतम कुमार झा और खेल शिक्षक सुरेश कुमार के नेतृत्व में ज्ञान ज्योति गुरुकुलम के बच्चों ने ‘बिहार दर्शन’ की शानदार प्रस्तुति दी। वहीं मध्य विद्यालय हरपुर, उच्च माध्यमिक विद्यालय नीलकंठपुर, मध्य विद्यालय सिंघाड़ा और कस्तूरबा विद्यालय महुआ के बच्चों ने भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
जाने-माने कव्वाल दर्वेश्वर राम रमण उर्फ रमन आजाद की शानदार कव्वाली महुआवासियों के लिए यादगार बन गई।
कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण बॉलीवुड गायिका माही जैन रहीं, जिनकी मधुर आवाज पर दर्शक झूम उठे। कॉमेडियन राज सोनी के ‘कॉमेडी पॉपेट शो’ ने लोगों को हंसी से लोटपोट कर दिया। दोनों कलाकारों की प्रस्तुतियों का दर्शकों ने देर शाम तक जमकर लुत्फ उठाया।
महोत्सव स्थल पर विभिन्न विभागों के स्टॉल, प्रदर्शनी और जागरूकता कार्यक्रम भी आकर्षण का केंद्र रहे। स्थानीय नागरिकों, युवाओं और बच्चों ने बड़ी संख्या में पहुँचकर महोत्सव का आनंद लिया।
एसडीओ विवेक चंद्र पटेल ने कहा, “महोत्सव का मुख्य उद्देश्य स्थानीय कला, संस्कृति और प्रतिभाओं को सशक्त मंच देना है। ऐसे आयोजनों से सामाजिक एकता बढ़ती है और नई प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।”
इस अवसर पर डीएसपी संजीव कुमार, सभापति नवीन चंद्र भारती, उप सभापति रोमी यादव, पीजीआरओ तनुजा श्री, डीसीएलआर खुशबू पटेल, कार्यपालक दंडाधिकारी सम्राट जीत, बीडीओ सौरभ बरनवाल, सीओ मणि कुमार वर्मा, पंचायती राज पदाधिकारी मुन्ना कुमार समेत कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
मंच संचालन कौशर परवेज़ ने अपनी प्रभावशाली आवाज और सजीव शैली से कार्यक्रम में अलग ऊर्जा भर दी। दूसरे दिन की भव्य प्रस्तुतियों और उमड़े जनसैलाब ने साबित कर दिया कि ‘महुआ महोत्सव’ अब क्षेत्र की मजबूत सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
