भोरे भोरे उठले लहरिया हे हे ननदी सैया के जगा द अंगुली में डसले–
भोरे भोरे उठले लहरिया हे हे ननदी सैया के जगा द अंगुली में डसले–
महुआ। रेणु सिंह
भोरे भोरे उठले लहरिया हे हे ननदी सैया के जगा द अंगुली में डसले नगिनिया हे–, दीयरा जलाई दहू भैया के बुलाई दहू नशे नशे उठले दरदिया–गीत जब सुरीली आवाज से रितिका राज ने अपनी सुंदर नृत्य के साथ सुनाई तो महफिल में उपस्थित लोग भी नाचने लगे। अवसर था यहां गांधी मैदान में आयोजित दो दिवसीय महुआ महोत्सव का।
महोत्सव में जैसे-जैसे रात बितते गया। कलाकारों की शमां ने लोगों को आकर्षित किया। रितिका राज की प्रस्तुति जैसे ही शुरू हुई। बाजार पूरी तरह सुनसान हो गया और लोग भागे भागे कार्यक्रम स्थल पर पहुंच गए। उनकी गायकी के साथ नृत्य पर तो युवा वर्ग ठुमके लगाते रहे।
रितिका राज ने कई पुराने गाने को सुना कर लोगों का दिल जीता। कार्यक्रम को देखने के लिए जनप्रतिनिधि और स्वयं पदाधिकारीयों की टीम भी बैठी रही।
सुख-चैन सवछिनी रे नैना मिलाइके:
कार्यक्रम में ऋचा चौबे का गीत सुख चैन सब छिनी रे नैना मिलाइके– गीत के साथ अन्य कलाकारों का शिव महिमा, देवी आराधना के साथ राष्ट्रीय गायन तालियां बटोरी। यहां पर कलाकारों के जलवे लोगों को देखने को मिले।
