“समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती पर महुआ में श्रद्धांजलि, सुधीर मालाकार ने किया नमन”
“समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती पर महुआ में श्रद्धांजलि, सुधीर मालाकार ने किया नमन”
महुआ, वैशाली: 11 अप्रैल 2026: समाज में शिक्षा की अलख जगाने वाले, महिला सशक्तिकरण के अग्रदूत और दलित-वंचित वर्गों के मसीहा *महात्मा ज्योतिबा फुले* की 199वीं जयंती आज पूरे देश में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है।
इस अवसर पर महुआ, वैशाली के प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े पत्रकार *सुधीर मालाकार* ने महात्मा फुले को कोटि-कोटि नमन करते हुए उनके विचारों को याद किया।
कौन थे महात्मा ज्योतिबा फुले:
11 अप्रैल 1827 को महाराष्ट्र के सतारा जिले में जन्मे ज्योतिराव गोविंदराव फुले ने 19वीं सदी में सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ बिगुल फूंका। उन्होंने *सत्यशोधक समाज* की स्थापना की और अपनी पत्नी *सावित्रीबाई फुले* के साथ मिलकर 1848 में पुणे में लड़कियों के लिए देश का पहला स्कूल खोला। जाति-व्यवस्था, छुआछूत और बाल-विवाह के खिलाफ उनका संघर्ष भारतीय समाज सुधार आंदोलन की नींव बना।
*महुआ में कार्यक्रम:*
जयंती के अवसर पर महुआ के सामाजिक संगठनों और पत्रकारों ने महात्मा फुले के चित्र पर माल्यार्पण कर उनके योगदान को याद किया। सुधीर मालाकार ने कहा, _”महात्मा फुले ने हमें सिखाया कि शिक्षा ही असली हथियार है। आज भी उनके विचार समाज को दिशा दे रहे हैं। हमें उनके बताए रास्ते पर चलकर भेदभाव मुक्त समाज बनाना है।”_
युवाओं ने महात्मा फुले के जीवन से प्रेरणा लेकर शिक्षा और समानता के लिए काम करने का संकल्प लिया।
*महात्मा फुले के प्रसिद्ध विचार:*
_”विद्या बिना मति गई, मति बिना नीति गई, नीति बिना गति गई, गति बिना वित्त गया, वित्त बिना शूद्र गए, इतने अनर्थ एक अविद्या से हुए।”_
*रिपोर्ट:* एन.आर. इंडिया टीवी न्यूज़, महुआ, वैशाली
