थायरॉयड कैंसर का पूरा इलाज अब एम्स पटना में, PET-CT और रेडियो-आयोडीन थेरेपी शुरू
थायरॉयड कैंसर का पूरा इलाज अब एम्स पटना में, PET-CT और रेडियो-आयोडीन थेरेपी शुरू
NR INDIA NEWS
पटना, 17 अप्रैल 2026: बिहार और झारखंड के हजारों मरीजों के लिए बड़ी राहत। एम्स पटना ने थायरॉयड कैंसर के इलाज के लिए अत्याधुनिक थेरानॉस्टिक न्यूक्लियर मेडिसिन सेवाओं की शुरुआत की है। अब रेडियो-आयोडीन थेरेपी और PET-CT स्कैन की समेकित सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध होगी।
➤ क्या बदला: पहले मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई या दूसरे महानगरों जाना पड़ता था। अब यह सुविधा पटना में ही मिलने से समय, पैसा और भावनात्मक ऊर्जा तीनों की बचत होगी।
➤ उद्घाटन किसने किया: सुविधा का उद्घाटन कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ प्रो. ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा, “यह सिर्फ मशीनों का जुड़ना नहीं बल्कि मरीजों के जीवन में राहत, विश्वास और समय पर सही इलाज का जुड़ना है। हमारा उद्देश्य है कि हर मरीज को बिना देरी के सटीक और सुलभ उपचार मिले।”
➤ मौके पर मौजूद: प्रो. डॉ. पूनम प्रसाद भदानी, प्रो. डॉ. उमेश भदानी, प्रो. डॉ. संजय कुमार पांडे, प्रो. डॉ. संजीव कुमार एवं प्रो. डॉ. चंद्रमोहन की गरिमामयी उपस्थिति रही।
➤ थेरानॉस्टिक्स का मतलब: न्यूक्लियर मेडिसिन विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार ने बताया, “थेरानॉस्टिक्स का मतलब है हर जांच सीधे इलाज का रास्ता तय करे। अब हर स्कैन सिर्फ रिपोर्ट नहीं बल्कि अगले कदम की स्पष्ट दिशा देगा। हम मरीजों को पर्सनलाइज्ड और टारगेटेड थेरेपी देने में सक्षम हैं।”
➤ सुविधा की ताकत: PET-CT, SPECT-CT गामा कैमरा और रेडियो-आयोडीन थेरेपी का एकीकृत उपयोग। इससे थायरॉयड कैंसर के सटीक निदान से लेकर प्रभावी उपचार तक की पूरी प्रक्रिया एक ही जगह संभव होगी।
➤ मरीजों को फायदा:
1. इलाज के लिए राज्य से बाहर जाने की जरूरत नहीं
2. समय पर उपचार, बेहतर परिणाम
3. खर्च में कमी, सुविधा में वृद्धि
4. परिवार के साथ रहकर मानसिक संबल
5. सर्जरी के बाद समय पर रेडियो-आयोडीन थेरेपी से पूर्ण स्वस्थ होने की बेहतर संभावना
➤क्षेत्र में पहला: एम्स पटना वर्तमान में बिहार और झारखंड का एकमात्र सरकारी संस्थान है जहां यह संपूर्ण सुविधा किफायती दरों पर उपलब्ध है। PET-CT को गामा कैमरा के साथ जोड़कर संस्थान अब बीमारी का प्रारंभिक और सटीक पता लगाने के साथ इलाज के बाद उसकी प्रभावशीलता का मूल्यांकन भी कर सकेगा।
यह पहल एक वादा है कि अब इलाज के लिए दूरी नहीं बल्कि भरोसा मायने रखेगा। एम्स पटना अब सिर्फ संस्थान नहीं बल्कि उम्मीद, विश्वास और स्वस्थ भविष्य का केंद्र बनकर उभर रहा है।
