“सदन से बाहर पसमांदा की आवाज़” – इरफान जामियावाला ने परिवारवाद पर उठाए सवाल
“सदन से बाहर पसमांदा की आवाज़” – इरफान जामियावाला ने परिवारवाद पर उठाए सवाल
पटना, 3 मई 2026: बिहार की राजनीति में एक बार फिर परिवारवाद को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रसिद्ध पसमांदा मुस्लिम नेता, समाजसेवक और लेखक इरफान जामियावाला ने सत्ता के गलियारों में वंशवाद की राजनीति पर तीखा हमला बोला है।
“हम तब से संघर्ष कर रहे जब ये पेट में थे”: इरफान जामियावाला ने कहा — “जब तेजस्वी यादव, दीपक प्रकाश और निशांत अपनी माँ के पेट में थे, तब से इरफान जामियावाला राजनीति के सेट पर संघर्ष कर रहे थे। लेकिन आज भी पसमांदा मुसलमानों की आवाज़ सत्ता के किसी सदन में मौजूद नहीं है।”
तेजस्वी को जिताया, निशांत को मंत्री बनाने की चर्चा: उन्होंने याद दिलाया कि जब तेजस्वी यादव राजनीति में आए तो उन्हें बिहार घुमाने की जिम्मेदारी युवा राजद के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष शिवचंद्र राम को दी गई। राघोपुर से जीतकर वे उपमुख्यमंत्री बने। आज निशांत कुमार को मंत्री बनाने की चर्चा है, जबकि वे न विधानसभा के सदस्य हैं, न विधान परिषद.
उरफ़ान जामियावाला ने कहा कि पिछली सरकार में उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र दीपक प्रकाश को मंत्री बनाया गया। सत्ता का लाभ मिला, लेकिन जनता के बीच राजनीतिक स्वीकृति कभी नहीं मिली। “आज राजनीति में संघर्ष नहीं, बल्कि सरनेम और परिवार ही योग्यता बन चुका है।”
उन्होंने दर्द बयां किया कि जिन पसमांदा मुसलमानों ने हर चुनाव में लोकतंत्र को मजबूत किया, उनके बीच से आज तक कोई बड़ा चेहरा सदन तक नहीं पहुँच पाया। “ना लोकसभा में मजबूत प्रतिनिधित्व, ना राज्यसभा में आवाज़, ना विधान परिषद में हिस्सेदारी, और ना ही मंत्रालयों में सम्मानजनक भागीदारी।””
अगर राजनीतिक परिवारों के बेटों को बिना संघर्ष सत्ता मिल सकती है, तो फिर मेहनतकश, पिछड़े, दलित और पसमांदा समाज के युवाओं को अवसर क्यों नहीं?”* उन्होंने कहा कि लोकतंत्र केवल परिवारों के बीच सत्ता हस्तांतरण का माध्यम नहीं है। “लोकतंत्र का असली अर्थ है – समाज के अंतिम व्यक्ति को भी प्रतिनिधित्व देना।”5û
आज पसमांदा मुसलमान सदन के बाहर खड़े होकर सिर्फ एक सवाल पूछ रहे हैं — “क्या इस देश की राजनीति में हमारा काम सिर्फ वोट देना है?”
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नसीम रब्बानी
NR INDIA NEWS
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