सेंट्रल जेल मोतिहारी में बंदियों को खिलाई गई फाइलेरिया की दवा /रिपोर्ट नसीम रब्बानी
सेंट्रल जेल मोतिहारी में बंदियों को खिलाई गई फाइलेरिया की दवा /रिपोर्ट नसीम रब्बानी
– 450 कैदियों सहित जेलकर्मियों को खिलाई गई दवा
– फाइलेरिया से बचाव को दवा सेवन जरूरी

मोतिहारी, 11 अक्टूबर। फाइलेरिया मुक्त अभियान के तहत पूर्वी चम्पारण जिले स्थित जिला कारावास मोतिहारी में स्वास्थ्य कर्मियों व जेल प्रशासन के सहयोग से 450 कैदियों सहित जेलकर्मियों को फाइलेरिया रोग के बारे में जानकारी देते हुए फाइलेरिया की दवा का सेवन कराया गया। सर्वजन दवा सेवन कार्यक्रम के तहत सभी कैदियों को डीईसी और अल्बेंडाज़ोल की दवा खिलाई गई। मौके पर नोडल पदाधिकारी डॉ राजेश कुमार ने फाइलेरिया बीमारी से जागरूक करते हुए कहा कि फाइलेरिया को हाथीपाँव रोग के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें बुखार का आना, शरीर पर लाल धब्बे या दाग का होना एवं शरीर के अंगों में सूजन का आना फाइलेरिया की शुरुआती लक्ष्ण होते हैं। यह क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से फैलता है। वहीं इससे बचने के लिए मच्छरदानी का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। साथ ही फाइलेरिया की दवा का सेवन अवश्य करना चाहिए ।
फाइलेरिया की दवा का सेवन सभी लोगों के लिए लाभप्रद है
पीसीआई के एसएमसी मनोज कुमार ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर रोग है जिसे फाइलेरिया की दवा सेवन से ही बचा जा सकता है। कभी-कभी फाइलेरिया के परजीवी शरीर में होने के बाद भी इसके लक्षण सामने आने में वर्षों लग जाता है। इसलिए फाइलेरिया की दवा का सेवन सभी लोगों के लिए आवश्यक है। उन्होंने बताया लोग खाली पेट दवा का सेवन नहीं करें। फाइलेरिया मुक्त अभियान में डीईसी एवं अल्बेंडाजोल की गोलियों को लोगों को आशा कार्यकर्ताओं के सामने खाना है । उन्होंने बताया कि गर्भवती महिलाओं, गंभीर रूप से बीमार लोग या 2 साल से कम उम्र के बच्चों को दवा का सेवन नहीं करना है। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ शरदचंद्र शर्मा ने बताया कि दवा के सेवन के उपरांत कुछ लोगों को अनुषंगी प्रभाव जैसे पेट दर्द उल्टी बुखार चक्कर इत्यादि होने की संभावना है परंतु इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। यह सामान्य लक्षण है। अगर किसी को किसी प्रकार की विशेष तकलीफ या दिक्कत होती है तो वैसे लोग जाकर नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक की सलाह से अपना स्वास्थ्य जांच करा सकते हैं।
ऐसे लेनी है फाइलेरिया की दवा:
2 से 5 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की एक गोली एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली, 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को डीईसी की दो गोली एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली एवं 15 वर्ष से अधिक के लोगों को डीईसी की तीन गोली एवं अल्बेंडाजोल की एक गोली दी जाएगी। अल्बेंडाजोल का सेवन चबाकर किया जाना है।
मौके पर केंद्रीय जेल अधीक्षक विदु कुमार, नोडल ऑफिसर डॉ आलोक कुमार, पीसीआई के एसएमसी मनोज कुमार, सहित अन्य स्वास्थ्य कर्मी मौजूद थे।
