एक शाम फैज अहमद फैज के नाम* समस्तीपुर (जकी अहमद)
*एक शाम फैज अहमद फैज के नाम*
समस्तीपुर (जकी अहमद)
उर्दू के मशहूर इंकलाबी शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की यौमे – पैदाइश (जयंती) के मौके पर जनवादी लेखक संघ की समस्तीपुर जिला इकाई की ओर से एक कवि सम्मेलन – मुशायरा का आयोजन कल शाम में कलेक्ट्रेट के सामने अवस्थित अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ भवन में किया गया। “एक शाम फ़ैज़ के नाम” से आयोजित कवि सम्मेलन – मुशायरा की अध्यक्षता जनवादी लेखक संघ की जिला इकाई के अध्यक्ष शाह ज़फ़र इमाम ने की जबकि संचालन की जिम्मेदारी संगठन की जिला इकाई के सचिव रामदेव महतो ने संभाली। कार्यक्रम की शुरुआत में संगठन के अध्यक्ष एवं सचिव ने फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की जिंदगी और उर्दू अदबी दुनिया में उनके खिदमात का तफसील से जिक्र किया गया। उन्होंने कहा कि फ़ैज़ ने अपनी रचनाओं में आम आवाम की जिंदगी, उनके दु:ख – सुख, मुफलिसी, जेहालत, समाज में नाबराबरी और जुल्मों – सितम को केंद्र में रखते हुए समाज में अमन, भाईचारे और मोहब्बत को मजबूत करने के लिए अपनी रचनाओं का विषय – वस्तु बनाया।
उन्होंने कहा कि अपनी बेबाकी की वजह से फ़ैज़ जैसे शायर को पाकिस्तानी हुकूमत से भी पंगा लेना पड़ा और यही वजह है कि कई सालों तक जेल की सिकचों में उन्हें डाल दिया गया। उन्होंने कहा कि आम मेहनतकश आवाम की तरफदारी में अपनी कलम का इस्तेमाल करने के लिए हमेशा खड़ा रहने वाला फ़ैज़ जैसा शायर कभी मरता नहीं बल्कि इतिहास का एक हिस्सा बन जाता है। खिराज – ए -।अकीदत पेश करने के बात कवि सम्मेलन मुशायरा की शुरुआत हुई। हिंदी के चर्चित कवि राजकुमार राय राकेश द्वारा सर्वप्रथम अपनी रचनाओं का पाठ किया गया। उनके बाद कवि रामाश्रय राय राकेश, डॉo रोली द्विवेदी, सुजीत कुमार, अशोक अश्क तथा उर्दू के शायरों में कासिम सबा, ताबिश जमाली एवं मोहम्मद मुजम्मिल ने अपनी – अपनी रचनाओं का पाठ करते हुए आज के हालात और इंसानियत के गिरते हुए स्तर का जिक्र किया। बलवंत प्रसाद के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर डॉo कृष्ण कुमार सिन्हा, रामप्रकाश यादव, राम सागर पासवान, जाकिर अहमद सिद्दीकी, भिखारी भास्कर, इसरार अहमद, संतोष कुमार चौधरी, एवं खुर्शीद आलम सहित दर्जनों साहित्य प्रेमी उपस्थित थे।
