अभी इ हाल ,त जेठ में की हाल ।आलेख: सुधीर मालाकार।
अभी इ हाल ,त जेठ में की हाल ।आलेख: सुधीर मालाकार।
हाजीपुर( वैशाली) ऋतु बसंत अपने आप में सर्वोत्तम कहा गया है लेकिन ग्रीष्म ने समय पूर्व ही अपनी दखल देकर लोगों के मन मस्तिष्क पर एक भय का आभास दिला दिया है । बताते चलें कि मार्च अप्रैल महीने में हल्की हल्की गुलाबी जार हुआ करता थी, लेकिन इस बार मौसम में इस कदर अपना रुख पलटा, वैशाख जेठ की गर्मी का आभास इस फागुन चैत महीने में देने लगी । तापमान जहां पर 38 से 40 डिग्री तक बनी हुई है तथा मौसम वैज्ञानिक के अनुसार और भी गर्मी बढ़ने की संभावना है। जिससे लोगों के जेहन में आने वाले गर्मी की तपिश को ख्याल करते हुए हर चौक चौराहे पर अपनी बज्जिका भाषा में चर्चा करते हुए देखा जा रहा है, कि “अभी इ हाल ,त जेठ में की हाल ” इससे अंदाजा लगाया जा सकता है ।लोग कितने अंदर से आशंकित हैं, जितनी मुंह उतनी बात ,,कोई कहता है यूक्रेन रूस का युद्ध हो रहा है ,जिसके कारण वहां की गोलाबारी होने से गर्मी बढ़ रही है, कोई कहता इस बार बारिश अधिक हुई थी ,जिससे गर्मी ज्यादा होने की उम्मीद है। मौसम की इस बेरुखी करवट से किसान भी चिंतित हैं ।
अभी जहां लोगों की सब्जी की खेती तथा दलहनी खेती के लिए हल्की गर्मी की आवश्यकता थी लेकिन इस फागुन चैत महीने में ही भीषण गर्मी पड़ना शुरू हो गया, जिससे लोगों को बेचैनी में रात काटते हुए देखा गया। वैसे तो बिजली की आपूर्ति तो होती ही है लेकिन बीच में बिजली गुल होते ही लोगों में बेचैनी सी छा जाती है। लोगों के हाथ से पंखा लिए सड़कों पर टहलते देखा जा सकता है ।पेड़ पौधे में अभी पूर्ण रुपेन पतझड़ के बाद पत्ता लगे भी नहीं है, ताकि लोग पेड़ पौधे के पास जाकर छाया में आश्रय लेकर शांति महसूस कर सकें। अगर इसी तरह गर्मी की तपिश बढ़ती रही तो इस बार वैशाख जेठ की दुपहरी सहन कर पाना आसान नहीं होगा ।
