May 13, 2026

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दस्त से बचाव के लिए अब 15 जुलाई तक खिलाई जाएगी जिंक की गोली

दस्त से बचाव के लिए अब 15 जुलाई तक खिलाई जाएगी जिंक की गोली

– 6 लाख 58 हजार से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरण का लक्ष्य
– करीब 5 लाख 84 हजार बच्चों को मिलेगा लाभ
– जिले में बढ़ाई गई दस्त नियंत्रण पखवाड़ा की अवधि

वैशाली। 3 जुलाई
जिले में डायरिया के कारण होने वाले शिशु मृत्युदर को शून्य करने के लिए 1 जून से 30 जून तक दो पखवाड़े में दस्त नियंत्रण पखवाड़े का आयोजन किया गया था। राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने प्रदेश के 26 जिलों (जिसमे वैशाली भी शामिल है) के सिविल सर्जन को एक पत्र जारी किया है, जिसमें दस्त नियंत्रण पखवाड़े की अवधि में विस्तार करते हुए इसे 15 जुलाई तक जारी रखने का निर्देश दिया है। ताकि शत प्रतिशत लक्ष्य की पूर्ति की जा सके।

डायरिया से बच्चों में होने वाली मौत को रोकना जरूरी:

डब्ल्यूएचओ के अनुसार पांच वर्ष तक के बच्चों में डायरिया मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारक है। पूरे विश्व में करीब अकेले 5 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत सिर्फ डायरिया से होती है। वहीं सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के अनुसार विश्व में प्रत्येक 9 बच्चों में से एक बच्चे की मौत डायरिया से ही होती है। साथ ही एचआईवी ग्रस्त बच्चों में डायरिया और जानलेवा हो जाता है। सीडीसी के अनुसार डायरिया ग्रस्त बच्चों में मृत्यु दर एचआईवी के बिना ही 11 गुना ज्यादा होती है। इसके अलावा एक सुखद तथ्य भी डब्ल्यूएचओ और सीडीसी के द्वारा बताया गया है कि डायरिया से बचाव काफी आसान है। रोटावायरस वैक्सीन और सुरक्षित जल, स्तनपान और स्वच्छता के द्वारा इसे काफी कम किया जा सकता है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रत्येक साल पांच वर्ष के उम्र तक के बच्चों के बीच दस्त नियंत्रण पखवाड़ा मनाया जाता है।

इस पखवाड़े के दौरान जीरो से पांच साल तक के बच्चों में ओआरएस पैकेट व जिंक के सिरप या टेबलेट का वितरण कर उनके इस्तेमाल के तरीकों को बताया जाएगा। जिले में दस्त नियंत्रण पखवाड़े से लाभांवित होने वाले बच्चों की संख्या करीब 5 लाख 84 हजार से ज्यादा है। वहीं इनमें 6 लाख 58 हजार 884 ओआरएस के पैकेट तथा 26 लाख से ज्यादा जिंक के टैबलेट का वितरण का लक्ष्य रखा गया है।

छोटे गांव व बस्तियां भी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में:

दस्त नियंत्रण पखवाड़ा के दौरान समस्त पांच वर्ष की उम्र के बच्चों के साथ पांच वर्ष की उम्र वाले वैसे बच्चे जिन्हें पखवाड़े के दौरान दस्त रोग हुआ हो लक्षित लाभार्थी की श्रेणी में आएगें। वहीं जिन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गयी है उनमें शहरी झुग्गी झोपड़ी, कठिन पहुंच वाले क्षेत्र, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र, छोटे गांव, बस्ती के साथ वैसे क्षेत्र जहां पहले के वर्षों में दस्त के मामले ज्यादा आए हो या जहां साफ सफाई व साफ पानी की आपूर्ति एवं स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी हो।

डायरिया में जीवन रक्षक का काम करता है ओआरएस और जिंक:

राज्य स्वास्थ्य समिति द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि डायरिया के दौरान ओआरएस और जिंक का प्रयोग जीवन रक्षक का कार्य करता है। ऐसी स्थिति में प्रत्येक बच्चे को एक एक पैकेट ओआरएस और जिंक के टैबलेट का वितरण किया जाएगा। वहीं ओआरएस को स्वास्थ्यकर्मी बच्चों के अभिभावक को उसके बनाने की विधि भी समझाएगें।

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वैशाली में एचपीवी टीकाकरण अभियान ने पकड़ी रफ्तार, 24.5 हजार टीकाकरण के साथ राज्य में अव्वल -डीएम ने समीक्षा बैठक में दिए अभियान तेज करने के निर्देश -मिशन मोड में टीकाकरण, हर पात्र किशोरी तक पहुंच बनाने पर जोर -सर्वाइकल कैंसर से बचाव में एचपीवी वैक्सीन सुरक्षित व प्रभावी -अभिभावकों से अपील: 14-15 वर्ष की बेटियों का निःशुल्क टीकाकरण कराएं वैशाली। जिले में संचालित एचपीवी टीकाकरण अभियान को लेकर जिला पदाधिकारी वर्षा सिंह के द्वारा आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबंधित पदाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की गई। समीक्षा बैठक के दौरान अभियान की प्रगति का विस्तृत आकलन किया गया, जिसमें यह जानकारी दी गई कि जिले में अब तक 24.5 हजार किशोरियों का टीकाकरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। जिला पदाधिकारी द्वारा शेष लक्षित किशोरियों का टीकाकरण शीघ्र पूर्ण करने हेतु कार्यों में और तेजी लाने के निर्देश दिए गए। जिला पदाधिकारी द्वारा स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया कि सभी प्रखंडों में टीकाकरण अभियान को मिशन मोड में संचालित किया जाए। विद्यालयों एवं स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से अधिकाधिक किशोरियों तक पहुंच सुनिश्चित की जाए तथा जागरूकता गतिविधियों को और प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार की भ्रांति या संकोच के कारण कोई भी बालिका टीकाकरण से वंचित न रह जाए। उन्होंने कहा कि “एचपीवी वैक्सीन पूरी तरह सुरक्षित एवं प्रभावी है और यह सर्वाइकल कैंसर से बचाव का एक अत्यंत सशक्त माध्यम है। यह हमारी बेटियों के स्वस्थ, सुरक्षित और सशक्त भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।” बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं एवं शिक्षकों के समन्वय से घर-घर तक जागरूकता फैलाते हुए पात्र किशोरियों की पहचान सुनिश्चित की जाए और उन्हें समय पर टीकाकरण से जोड़ा जाए। जिला पदाधिकारी द्वारा अभिभावकों से विशेष अपील की गई कि वे अपनी 14-15 वर्ष आयु वर्ग की बेटियों का निःशुल्क एचपीवी टीकाकरण अवश्य कराएं तथा इस जनहितकारी अभियान में सक्रिय सहयोग प्रदान करें। उन्होंने कहा कि थोड़ी सी जागरूकता और सहभागिता भविष्य में गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान कर सकती है। इस अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दें और अधिक से अधिक किशोरियों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें, ताकि एक स्वस्थ एवं सुरक्षित समाज की दिशा में ठोस कदम सुनिश्चित किया जा सके।

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