पातेपुर के लोगों की निगाहें मंत्रिमंडल विस्तार पर अटकी -1952 से अब तक पातेपुर के कोई विधायक नहीं बन पाए हैं मंत्री
पातेपुर के लोगों की निगाहें मंत्रिमंडल विस्तार पर अटकी
-1952 से अब तक पातेपुर के कोई विधायक नहीं बन पाए हैं मंत्री
संवाददाता, पातेपुर।
नवमी बार नीतीश कुमार बिहार के मुंख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं। उनके अलावा बीजेपी-जदयू के आठ विधायकों ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली है। सीएम नीतीश कुमार ने जल्द ही राज्य कैबिनेट के विस्तार के संकेत दिए हैं, ऐसे में एकबार फिर पातेपुर सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र के करीब छह लाख लोगों की निगाहें मंत्रिमंडल विस्तार पर लग गई है।
75 वर्षों में पातेपुर को नहीं मिली मंत्रिमंडल में जगह
दलीय व जातीय पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर पातेपुर के दर्जनों बुद्धिजीवियों ने बेवाकी से अपनी राय रखते हुए कहा कि पातेपुर समाजवादियों की भूमि रही है। पहला आम चुनाव 1952 से लेकर अब तक कोंग्रेसी, गैर कॉंग्रेसी विधायक चुनते आ रहे हैं। लंबे समय से पातेपुर विधानसभा सीट आरक्षित है। गुजरे 75 वर्षों में बिहार में बनी कॉंग्रेसी-गैर कोंग्रेसी सरकारों में पातेपुर से निर्वाचित प्रतिनिधि को मंत्री पद नहीं मिला। जातीय-दलीय समीकरण का पलड़ा दूसरी ओर झुके होने के बावजूद पीएम मोदी की करिश्माई व्यक्तित्व का प्रभाव का परिणाम है कि पिछले दो टर्म से बीजेपी प्रत्याशी निर्वाचित हुए। फिलवक्त बीजेपी के लखेन्द्र कुमार रौशन उर्फ लखेन्द्र पासवान विधायक हैं। बीजेपी के मुखर विधायकों में एक हैं। पार्टी सत्ता में रही या विपक्ष में पातेपुर विधायक अपनी सशक्त भूमिका व उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं। ऐसे में लोगों की उम्मीद जग गई है कि 12 जनवरी तक संभावित मंत्रिमंडल विस्तार में विधायक लखेन्द्र को जगह देकर बीजेपी व जदयू नेतृत्व अब तक वंचित पातेपुर के लोगों की चिर आकांक्षाओं की पूर्ति करेंगे।
