36 घंटे का होगा इस बार जितिया पर्व ।
36 घंटे का होगा इस बार जितिया पर्व ।
(23 सितंबर को नहा खाय ,24 सितंबर के सुबह ओगठन,25 सितंबर के शाम 5:05 पर पारण एवं पर्व की पूर्णाहुति )
रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
हाजीपुर (वैशाली ) जीमूतवाहन (जितिया) पर्व भविष्य पुराण के अनुसार प्रचलन में है। इस पर्व की कथा भविष्य पुराण में ही वर्णित है। कहा गया कि विष्णु धर्मोत्तर के वचन के उल्लेख करते हुए महोपाध्याय पक्षधर मिश्र अपने तिथि चंद्रिका नामक कृति में कहा कि पहले दिन या अगले दिन प्रदोष काल में जिस दिन अष्टमी तिथि प्राप्त हो ,उसी दिन व्रत करना चाहिए। पंडित महेश ठाकुर ने स्पष्ट कहा कि सप्तमी तिथि में सूर्योदय होने के बाद यदि अष्टमी तिथि प्राप्त होती है तो उसी दिन प्रदोष से भी अपनी इस व्रत को करना चाहिए ।अगले दिन अष्टमी तिथि की समाप्ति पर पारण करने की परंपरा वर्षो पुरानी है ।मिथिला की परंपरा से विभिन्न मत मानने वाले लोग तिथि चंद्रिका के अनुसार कहते हैं की अष्टमी में सूर्योदय होने पर व्रत करना चाहिए यह असंगत है, क्योंकि यह पश्चिमी किसी दिन भी प्रदोष व्यापनी प्राप्त नहीं हो तो उदय व्यापनी में व्रत करने का विधान है। लक्ष्मी व्रत को भी जीवित्पुत्रिका कहा जाता है लेकिन यह व्रत भी जब अष्टमी तिथि में चंद्रोदय को तब करना चाहिए ।इस वर्ष 2024 में आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि 24 सितंबर 2024 मंगलवार को शाम 6:06 मिनट से प्रारंभ होकर 25 सितंबर 2024 बुधवार को शाम 5:05 तक है। अतः 23 सितंबर सोमवार के दिन संयम नियम अर्थात नहा खाय ,भोर मे ओंगठन एवं 24 सितंबर मंगलवार को व्रत सायं काल में जीवित वाहन पूजन पुनः 25 सितंबर बुधवार को शाम 5:05 के बाद पारण करना हैं ,शास्त्र दृष्टि से कल्याण पद है ।स्वास्थ्य की दृष्टि से उपवास लंबा होने के कारण उत्पन्न समस्या समाधान के लिए सामाजिक व्यवस्था के अनुरूप पशुवत, मधुर जल पीने की व्यवस्था चली आ रही है। शास्त्र भी कहता है कि एक बार मधुर जल पीने से उपवास भंग दोष नहीं लगता । यह जानकारी प्रधानाध्यापक श्री रामानंद संस्कृत महाविद्यालय ,पातेपुर मठ के देवेंद्र झा के द्वारा उद्धरित है ।इनके मत यानी मिथिला पंचांग के मत का समर्थन इन लोगों ने भी किया ,जिसमें नंदकिशोर झा ,बृजभूषण मिश्रा, कृष्ण कुमार झा ,शशि भूषण मिश्रा ,विनोद झा, संजय मिश्रा, रमाकांत मिश्रा ,रविंद्र झा, परशुराम झा ,दीपक झा,शशांक झा,नवल झा शामिल है ।
