April 17, 2026

NR INDIA NEWS

News for all

स्वतंत्र भारत से प्रथम प्रधानमंत्री नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे : डा.अजीत कुमार

स्वतंत्र भारत से प्रथम प्रधानमंत्री नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे : डा.अजीत कुमार ।

रिपोर्ट सुधीर मालाकार,  वैशाली 

हाजीपुर (वैशाली) भारत के प्रथम प्रधानमंत्री एवं स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस कि 128 वीं जयंती समारोह “पराक्रम दिवस “के रुप में स्वामी विवेकानंद समाजिक शोध संस्थान बिहार ने हाजीपुर नगर के सिनेमा रोड स्थित पतंजलि चिकित्सालय एवं योग सेवा केंद्र में धूमधाम से समारोह पूर्वक मनाया गया।
सर्वप्रथम नेताजी सुभाष चंद्र बोस के तैलिय चित्र पर पुष्पांजलि व दीप प्रज्वलित कर डॉ अजीत कुमार ने कहा कि नेता सुभाष चंद्र बोस स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री थे। वास्तव में 1943 को ही सिंगापुर में नेता जी ने भारत की स्वतंत्रता की घोषणा कर ,अंग्रेजों को अविलंब भारत भारत छोड़ने का हुकुम दिया था। डॉ अजीत कुमार ने कहा कि भारत की आजादी उपहार के रूप नहीं बल्कि कुर्बानी से मिला।
मुख्यवक्ता प्रो डॉ अजीत कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि नेताजी ने सन् 1943 ई को ही सिंगापुर में भारत ही स्वतंत्रता की घोषणा कर दी। नेताजी स्वतंत्रता भारत के प्रथम सरकार के प्रमुख नेता जी को बनाया गया। इसलिए नेताजी ही स्वतंत्र बात की प्रथम प्रधानमंत्री हुए। भारत के घोर विरोधी जर्मन का शासक अडोल्फ हिटलर नेताजी अदम साहस और क्षमता देखकर सुभाष चंद्र बोस को” नेताजी ” कह कर संबोधित किया । हिटलर ने नेता जी को वचन दिया था, कि मैं वैश्विक मंच पर भारत के स्वतंत्रता का विरोध नहीं करूंगा ।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने खुद को सपनों का स्वप्नदर्शी कहा था। हालांकि आज दुनिया के मन में नेताजी की पहली छवि आजाद हिंद फौज के जनरल के तौर पर उभरती है ,और उनका तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा का नारा बरवस जेहन से टकरा जाता है। हकीकत में नेताजी का योगदान भारतीय राजनीति की दशा और दिशा को बदलने में कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण था।
जयंती समारोह की अध्यक्षता प्रोफेसर डॉक्टर अजीत कुमार ने किया जबकि संचालन अंकित कुमार सिंह शाहपुर ने की।
समारोह के मुख्य अतिथि प्रो भूपेंद्र प्रसाद सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस हर हाल में स्वतंत्रता चाहते थे। उन्होंने नारा दिया “दिल्ली चलो” यानी ब्रिटिश हुकूमत भारत छोड़ो ।उनका ही नारा “जय हिंद “और “तुम खून दो मैं तुझे आजादी दूंगा ” ऐसे नारा आजादी के दीवानों में उल्लास समर्पण और कुर्बानी की क्षमता प्रबल हो जाती थी ।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए दृष्टि चौहान ने कहीं की नेताजी जन्म से ही राष्ट्रवादी थे। उनका जन्म 23 जनवरी 1897 ई को उड़ीसा के कटक में हुआ था l सुभाष चंद्र बोस विवेकानंद की अध्यात्म और सनातनी शिक्षा से अत्यधिक प्रभावित थे । नेताजी स्वामी विवेकानंद को अपना आध्यात्मिक गुरु मानते थे। 1911 ईस्वी में कोलकाता प्रोविंस से मैट्रिकुलेशन की परीक्षा में दूसरा स्थान हासिल करने के बाद वे कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया ।सन 1918 ई को उन्होंने दर्शन शास्त्र से स्नातक की परीक्षा पास की। 1919 ईस्वी में इंग्लैंड गए। वहां उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। वर्ष 1920 इसमें इंडियन सिविल सर्विस की परीक्षा पास की। लेकिन वह ब्रिटिश सरकार के अधीन काम करने से इनकार कर दिया और सिविल सर्विस की नौकरी से त्यागपत्र दिया।
जबकि चितरंजन दास उनके राजनीतिक गुरु से वर्ष 1921 में रूस ने चितरंजन दास की स्वराज पार्टी द्वारा प्रकाशित समाचार पत्र फॉरवर्ड के संपादन का कार्यकाल संभाला। नेताजी सुभाष चंद्र बोस दो बार जबलपुर सेंट्रल जेल ले गए।
” तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा”, ” दिल्ली चलो ” और “जय हिंद ” जैसे नारों से सुभाष चंद्र बोस ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में नई जान फुकी थी । उनके जोशीले नारे ने सारे भारत को एकता के सूत्र में बांधने का काम किया और उनके नारों से अभिभूत होकर नौजवानों ने देश की आजादी के लिए अपने आहुति देने के लिए आगे बढ़ गए।
समारोह में प्रोफेसर डॉ अजीत कुमार प्रो भूपेंद्र प्रसाद सिंह अंकित कुमार सिंह हिमांशु कुमार सिंह राजीव रंजन सिंह उर्फ चंदन जी अधिवक्ता मनीष कुमार यादव राजा कुमार कुशवाहा राहुल कुमार झा हिमांशु राज आशीष राज सिंह अमन कुमार राजीव कुमार नीतीश कुमार रितिक कुमार एवं गौतम कुमार ने अपने-अपने विचार व्यक्त किया।

आगत अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन अंकित कुमार सिंह एवं मनीष कुमार यादव ने संयुक्त रूप से किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.