April 17, 2026

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नीतीश प्रभाकर चौधरी अलीनगर में हो सकते हैं एनडीए का

नीतीश प्रभाकर चौधरी अलीनगर में हो सकते हैं एनडीए का चेहरा.

आगामी विधानसभा में एनडीए और महागठबंधन दोनों अपने सबसे मजबूत उम्मीदवारों पर दांव लगाना चाह रही है सीट बंटवारा के समय पार्टी को सीट मांगने के लिए अपने पहलवानों का नाम भी सामने रखना पड़ेगा इस बार सिटिंग उम्मीदवार होना कोई मानदंड नहीं है बल्कि क्षेत्र में आपकी उपलब्धि लोगों के बीच सबसे ज्यादा पॉपुलर होना जातीय समीकरण में फिट बैठना सीट निकाल कर देने की क्षमता रखना आधार बन रहा है
कहा जा सकता है कि बिहार में पहली बार एक अलग तरह से प्रयोग किया जा रहा है जिसमें सीट किसी का हो ,लड़ेगा वही जो आपके फोल्डर में सबसे मजबूत उम्मीदवार हो
मतलब साफ और स्पष्ट है, एनडीए हर हाल मे अपने 225 का लक्ष्य हासिल करना चाहती है। विधानसभा में उसी व्यक्ति को टिकट मिलेगा जो जातीय समीकरण,क्षेत्र में पापुलैरिटी अपने दम पर भी जीतने की ताकत के , उम्मीदवार की सामाजिक पृष्ठभूमि, क्षेत्र में उसका राजनीतिक प्रभाव, प्रखंड स्तर तक के पार्टी नेताओं की सहमति, सर्वे रिपोर्ट घटक दलों में सहमति का विशेष ख्याल रखी जा रही है।
एनडीए इस बात को समझ रही है कि यदि 2025 में बिहार में सत्ता पुनः हासिल करनी है, तो उसे जोखिम रहित और मजबूत उम्मीदवारों को प्राथमिकता देनी होगी। अलीनगर जैसे क्षेत्र में नीतीश प्रभाकर जैसा सर्व स्वीकृत चेहरा एनडीए की संभावनाओं को मज़बूती देने वाला साबित हो सकता है
नीतीश प्रभाकर चौधरी अलीनगर में दूसरे नेताओं के अपेक्षा अभी काफी आगे चल रहे हैं और उनका उम्मीदवार बनना लगभग तय है। कारण वो हर उस मापदंड को पूरा करते हुए दिखाई दे रहे हैं जो एनडीए ने तय किया हुआ है। जनसांख्यिकी आंकड़ा को देखें तो यहां ब्राह्मण समुदाय सबसे बड़ा और सबसे संगठित वोट बैंक है, यहाँ “ब्राह्मण वोटर्स को संवेदनशील माना जाता है। यदि ब्राह्मण वोट एकजुट होकर किसी एक दल या उम्मीदवार के पक्ष मे जाता है, तो उसकी जीत लगभग सुनिश्चित होती है। जिसकी संख्या और प्रभाव दोनों समय के साथ-साथ काफी बढ़े हैं। इसलिए किसी भी दल को यहां जीतना है, तो उसे ब्राह्मणों को साधना ही होगा। नीतीश प्रभाकर को लेकर दलगत भावना से उपर उठकर ब्राह्मण मतदाताओं में काफी अभिरुचि है। स्थानीय राजनीतिक विशेषज्ञ बताते हैं कि आज जो समर्थन और सकारात्मक लहर नीतीश प्रभाकर के पक्ष में दिख रही है, वैसी स्थिति उनके पिता प्रभाकर चौधरी के समय में भी कभी नहीं रही। नीतीश प्रभाकर के पास पारिवारिक विरासत, बेदाग़ छवि, युवाओं से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक की पकड़ और संगठनात्मक एकजुटता — सभी मौजूद हैं। जदयू के पूर्व विधायक और दिवंगत वरिष्ठ नेता प्रभाकर चौधरी के सुपुत्र नीतीश प्रभाकर,अपनी साफ-सुथरी छवि, शांत स्वभाव और राजनीतिक प्रतिबद्धता के साथ तेजी से जनमानस का भरोसा जीतते जा रहे हैं। उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को केवल अपनाया ही नहीं, उसे अपनी सादगी और ईमानदार छवि से एक नई दिशा भी दी है। वे सियासी चालबाजियों से दूर रहते हैं, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनती जा रही है। जदयू के भीतर भी उन्हें चुनौती नहीं के बराबर है
विरोधी चाहे जदयू के भीतर हों या बाहर, उनका जनाधार इनके सामने लगातार क्षीण होता जा रहा है। भाजपा में एक अनार सौ बिमार वाली स्थिति है। पार्टी में एकरूपता का अभाव है और गुटबाजी चरम पर है। कोई ऐसा एक नेता नहीं है जो अपने बल पर सीट निकाल कर दे सके। उनकी लोकप्रियता इस स्तर की नहीं है । वह पूर्णता गठबंधन या यूँ कहें मोदी नाम पर मिलने वाले वोट पर निर्भर करेंगे ।
संजय कुमार सिंह उर्फ पप्पू सिंह, माधव झा आजाद, सुलेखा झा, शंकर चौधरी, बैद्यनाथ यादव सभी हाथ पांव मार रहे हैं । शंकर चौधरी ने तो निर्दलीय लड़ने की घोषणा भी कर दी है ।
ऐसे में सीट-बंटवारे के दौरान भाजपा को ये सीट सौंपा गया, तो भीतरी संघर्ष और गुटबाज़ी के कारण यह सीट गंवाने का जोखिम है।
उसके उलट, अगर यह सीट जदयू के खाते में जाती है और नीतीश प्रभाकर मैदान में होगें तो उनके पीछे जदयू यहां पर संगठित है एकजुट है । यहां तक की सभी प्रखंड पदाधिकारी, विधानसभा प्रभारी भी एक ही नाम पर मोहर लगाकर कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष को बता भी चुके हैं सब का नारा है ऊपर नीतीश नीचे नीतीश तब होगा 225 हैं। जानकार तो यहां तक बताते हैं की न सिर्फ पार्टी के सर्वे में वो सबसे आगे हैं, बल्कि एनडीए स्तर के अभी तक हुए तीनों सर्वे में भी नीतीश प्रभाकर सबसे आगे हैं। अब तो लोग यहां तक कह रहें हैं कि आप सिर्फ अपना चुनाव चिन्ह लेकर आओ, किसी पार्टी से हो या स्वतंत्र उम्मीदवार बनकर मैदान में आइये। चुनाव हम लोग लड़ेंगे और जीतेंगे
जिसने दुसरे संभावित उम्मीदवारों की नींद उड़ाकर रख दिया है। लेकिन नीतीश प्रभाकर चौधरी स्पष्ट कहते हैं, मैं जदयू मैं हूं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर मुझे पूरा विश्वास है, वो जो भी निर्णय करें, हमें स्वीकार है। जिससे नीतीश प्रभाकर चौधरी के प्रति लोगों में काफी सहानुभूति दिखाई दे रही है। कहने का तात्पर्य है कि अलीनगर का समीकरण जदयू और नीतीश प्रभाकर के साथ ही एनडीए के लिए भी उपयुक्त दिख रही है
जातिगत आधार पर मतदाताओं की संख्या की बात करें तो यहाँ ब्राह्मणों को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता है । बता दें कि पिछले चुनाव में ब्राह्मण वोटर्स की संख्या 65,000 थी,जो वर्तमान में बढ़कर 78,000 हो गई है। वहीं मुस्लिम 42,000 से 52,000, यादव 22,000 से बढ़कर 35,000 हो गई है। इसके आलावे यहां अन्य जातियाँ जैसे दलित, कुर्मी , राजपूत, वैश्य, पासवान आदि 20,000 के करीब पहुंच गई है, जो किसी भी चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, फिलहाल सभी नीतीश प्रभाकर चौधरी के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

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