चलना और टहलना सबसे बड़ी दवा है डाइबिटीज से बचने की ।
आज डाइबिटीज महामारी का रूप ले चुका है। हर दस में से चार लोग डाइबिटीज जैसे साइलेंट किलर से पिडित है । करीब चौदह करोड़ आबादी डाइबिटीज के चपेट में हैं और इससे दुगने डाइबिटीज होने के कगार पर खड़ा है । यह चिंता का विषय है कि आखिर इतनी तेजी से डाइबिटीज फैल क्यों रहा है कारण है हम सभी की जीवन शैली में परिवर्तन साथ ही तनाव भरा जीवन जिससे यह बिमारी को फैलने का मौका हम दे रहे हैं । अगर बात करें इससे बचने की तो यह तभी संभव है जब हम इस बिमारी के प्रति सचेत रहें रेगुलर वाक् करें योगासन करें और नींद पुरी ले । किन्तु यह नहीं हो पाता है और डाइबिटीज हमारे शरीर को खोखला कर देता है । उक्त बातें आस्था फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे वाक् फार लाइफ मुहिम के सैकड़ों पुलिस कर्मियों को संबोधित करते हुए मशहूर फिजिशियन डॉ दिवाकर तैजसवी ने कहीं। उन्होंने पुलिस कर्मियों से अपील करते हुए कहा कि आपकी भागदौड़ और तनाव भरा जीवन में कभी भी यह बिमारी आ सकती है अतः सचेत रहें । हमेशा ब्लड शुगर की जांच कराते रहे । आस्था फाउंडेशन के सचिव पुरुषोत्तम सिंह ने कहा कि बहुत ही सुन्दर और सफल रहा यह कार्यक्रम क्योंकि पुलिस कर्मियों को जागरूक करना बहुत मुश्किल था किन्तु आस्था फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे वाक् फार लाइफ मुहिम के तहत यह संभव हो सका । कार्यक्रम को सफल बनाने में धर्मेंद्र कुमार और सुजाता मेम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।