“राम नाम रूपी रत्न ही साथ जाएगा”—दिग्विजय जी महाराज
“राम नाम रूपी रत्न ही साथ जाएगा”—दिग्विजय जी महाराज
_रिपोर्ट: सुधीर मालाकार_
महुआ (वैशाली) जहांगीरपुर सलखन्नी के रामजानकी मंदिर परिसर में चल रहे नौ-दिवसीय महा विष्णु यज्ञ में प्रयागराज से पधारे कथावाचक आचार्य दिग्विजय जी महाराज ने कहा, *“लोग कहते हैं खाली हाथ आए-जाएंगे, पर सच यह है कि चाहें तो राम नाम-रूपी रत्न साथ ले जा सकते हैं।”* षष्ठम दिवस पर पुतना वध कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने राक्षसी पूतना को भी माँ का दर्जा दिया—“माँ से बड़ी कोई देवी नहीं, पिता से बड़ा कोई देवता नहीं; माता-पिता यहाँ ईश्वर-समान हैं।” महाराज ने चेताया कि मानव भौतिक सुखों व ‘मेरा-मेरा’ के चक्कर में फंसकर मोक्ष से चूकता है, जबकि कलि काल में राम-नाम ही उद्धार-मार्ग है। धन संग नहीं जाएगा, नाम-रूपी रत्न ही बेड़ा पार करेगा। महायज्ञ में उमेश कुमार सिंह, पप्पू चौधरी, दिनेश चौधरी,गणेश चौधरी,कपिल देव चौधरी,विनोद चौधरी,रघुनाथ चौधरी,प्रियांशु चौधरी,प्रकाश चौधरी, श्रीकांत दास सहित सैकड़ों लोग सक्रिय हैं।
