तीन बार वार्ड मेंबर रहने वाली क़मर सुल्ताना साहिबा के इंतकाल पर ग़म, बैरून-ए-मुल्क मुक़ीम बेटे भी जनाज़े व चेहलुम में हुए शरीक.
तीन बार वार्ड मेंबर रहने वाली क़मर सुल्ताना साहिबा के इंतकाल पर ग़म, बैरून-ए-मुल्क मुक़ीम बेटे भी जनाज़े व चेहलुम में हुए शरीक.
वैशाली: ज़िला वैशाली के महुआ ब्लॉक के मिर्ज़ा नगर, डोगरा के रहने वाले आरजेडी ब्लॉक अध्यक्ष व इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया के ब्यूरो चीफ़ जनाब नसीम रब्बानी साहब की अहलिया और *तीन बार वार्ड मेंबर* मुन्तख़ब होने वाली मोहतरमा क़मर सुल्ताना साहिबा का इंतकाल हफ़्ता, 4 अप्रैल 2026 की सुबह अचानक हरकत-ए-क़ल्ब बंद हो जाने से हो गया।♦
मरहूमा की उम्र तक़रीबन *60 साल* थी। वो इलाक़े में एक समाजी व फ़आल ख़ातून के तौर पर जानी जाती थीं। तीन बार वार्ड मेंबर की हैसियत से उन्होंने इलाक़े की तरक़्क़ी, सफ़ाई, पानी और ख़्वातीन की फ़लाह व बहबूद के लिए नुमायां ख़िदमात अंजाम दीं।
*पसमांदगान:* मरहूमा अपने पीछे सोगवार शौहर जनाब नसीम रब्बानी साहब, तीन साहबज़ादे, दो साहबज़ादियां, तीन बहुएं, दो पोते, दो पोतियां, तीन नवासे और दो नवासियां के साथ दो दामाद एक अशरफ़ अली (सिलीगुड़ी) दूसरा इंजीनियर नौशाद आलम (क़तर) छोड़ गई हैं।
*औलाद की तफ़सील:* बड़े साहबज़ादे मोहम्मद वसीम रब्बानी क़तर में एक प्राइवेट कंपनी में मुलाज़िम हैं। दूसरे साहबज़ादे मोहम्मद जसिम रब्बानी दुबई में एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। सबसे छोटे साहबज़ादे मोहम्मद नदीम रब्बानी सिविल इंजीनियर हैं और शिमला में एक प्राइवेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कंपनी में ख़िदमात अंजाम दे रहे हैं।
बड़ी साहबज़ादी ज़ीनत कौसर सिलीगुड़ी, पश्चिम बंगाल में अपने निजी मकान में मुक़ीम हैं, जबकि दूसरी साहबज़ादी नुसरत कौसर महुआ में अपने निजी मकान पर रिहाइश पज़ीर हैं। तमाम बेटे और बेटियां शादी-शुदा हैं।
*तजहीज़ व तदफ़ीन:* मरहूमा की नमाज़-ए-जनाज़ा इतवार, 5 अप्रैल 2026 की दोपहर के बाद आबाई क़ब्रिस्तान में अदा की गई। बैरून-ए-मुल्क और दीगर शहरों में मुक़ीम तमाम बेटों और बेटियों ने पहुंच कर मरहूमा के जनाज़े में शिरकत की और वालिदा के ईसाल-ए-सवाब के लिए दुआ-ए-मग़फ़िरत की। जनाज़े में सियासी, समाजी शख़्सियात, रिश्तेदारों और अहल-ए-इलाक़ा की बड़ी तादाद शरीक हुई।
*चेहलुम की तक़रीब:* मरहूमा के चेहलुम के मौक़े पर जुमेरात को डोगरा वाक़े रिहाइशगाह पर क़ुरआन ख़्वानी का एहतेमाम किया गया। ग़रीबों व मसाकीन में खाना तक़सीम किया गया। रात में महफ़िल-ए-मीलाद शरीफ़ का इनइक़ाद हुआ। तमाम अहल-ए-ख़ाना ने चेहलुम में शरीक हो कर वालिदा के लिए दुआ की। इस मौक़े पर समाजी भोज का भी इंतज़ाम किया गया था।
मुख़्तलिफ़ सियासी जमातों के रहनुमाओं, सहाफ़ी बिरादरी और समाजी तंज़ीमों ने नसीम रब्बानी साहब के घर पहुंच कर ताज़ियत पेश की और मरहूमा के दरजात की बुलंदी के लिए दुआ की।
दुआ में शामिल होने वालों में जनाब मुफ़्ती अली रज़ा साहब, मौलाना पीर-ए-तरीक़त मुस्तक़ीम साहब, डॉक्टर मुजीबुर्रहमान, मोतीउर्रहमान, जनाब एजाज आदिल साहब, सहाबी कलीम अशरफ़ साहब, आफ़ताब आलम उर्फ़ डबलू, मोहम्मद नसीम अहमद, मोहम्मद खुर्शीद आलम, मेराज आलम, माजिद अली (उर्फ़ गुड्डू), ग़ुलाम मुस्तबा (उर्फ़ सद्दन), मोहम्मद दानिश, मोहम्मद अंजुम, मोहम्मद इरशाद, मोहम्मद सदरे आलम, मोहम्मद शमीम रब्बानी, डॉक्टर मोहम्मद शादाब आलम, मोहम्मद फ़रोज़ आलम, हाफ़िज़ मोहम्मद नूरैन, वकील एजाज आलम शामिल थे।
अल्लाह तआला मरहूमा की मग़फ़िरत फ़रमाए, जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए और तमाम पसमांदगान को सब्र-ए-जमील अता करे। आमीन।
