April 21, 2026

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स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण, सतत निगरानी एवं कार्रवाई जारी

स्वास्थ्य केंद्रों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण, सतत निगरानी एवं कार्रवाई जारी

-कुढ़नी सीएचसी के प्रभारी एवं डॉक्टर (रोस्टर) पाये गये अनुपस्थित, दोनों से शो काउज करते हुए अगले आदेश तक वेतन बंद

-सभी डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मी को अलर्ट एंड मिशन मोड में सक्रियता एवं तत्परता के साथ कार्य करने की मिली हिदायत

 

 

मुजफ्फरपुर। 20 अप्रैल

जिले में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के खतरे को देखते हुए जिलाधिकारी श्री सुब्रत कुमार सेन के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग सहित जिले की पूरी टीम अलर्ट एंड मिशन मोड में सक्रिय एवं तत्पर है। इस क्रम में स्वास्थ्य केंद्रो को सक्रिय रखने, डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मी की ससमय उपस्थिति से लेकर इलाज की त्वरित एवं प्रभावी व्यवस्था बनाने के निमित्त अस्पतालों का औचक निरीक्षण, सतत निगरानी एवं कार्रवाई भी की जा रही है। इसके लिए भौतिक जांच से लेकर व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से मॉनिटरिंग की सुदृढ़ व्यवस्था विकसित की गई है। उल्लेखनीय है कि 19 अप्रैल को संध्या 7 बजे से 20 अप्रैल को पूर्वाह्न 8 बजे तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कुढ़नी में रोस्टर ड्यूटी के अनुसार डॉक्टर उमाशंकर तथा प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अनुपस्थित पाये गये। इसका खुलासा तब हुआ जब व्हाट्सएप ग्रुप पर की जा रही निगरानी में उनके द्वारा इस अवधि का एक भी फोटो शेयर नहीं किया गया। एईएस ड्यूटी के दौरान अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर सिविल सर्जन ने दोनों डॉक्टर का वेतन आदि अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है तथा स्पष्टीकरण करते हुए 24 घंटे के भीतर जवाब तलब किया गया है। जवाब संतोषप्रद नहीं पाये जाने पर अग्रेत्तर कार्रवाई हेतु विभाग को अवगत कराया जायेगा।

विदित हो कि जिले में एईएस के अब तक 16 मरीज प्रतिवेदित हैं जो अस्पताल में समुचित इलाज के उपरांत सुरक्षित घर वापस लौट गये हैं।

जिलाधिकारी ने प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक के अस्पतालों के डॉक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मियों को अपनी अपनी ड्यूटी एवं बच्चों के इलाज के प्रति मानवीय रूप से संवेदनशील एवं जवाबदेह होने तथा स्वास्थ्य केंद्रों पर ससमय उपस्थित होकर त्वरित रूप से प्रभावी इलाज की सुचारू एवं सुदृढ़ व्यवस्था रखने का निर्देश दिया है। इसके लिए पीएचसी, सीएचसी एवं जिला अस्पतालों में रोस्टर के अनुसार डाक्टर एवं स्वास्थ्य कर्मी की नियमित रूप से ससमय उपस्थिति से लेकर दवा एवं समुचित इलाज की व्यवस्था सुदृढ़ रखने की हिदायत दी गई है। जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन एवं डीपीएम को क्षेत्र भ्रमण कर स्वास्थ्य केंद्रों पर इलाज की सभी आवश्यक व्यवस्था सुदृढ़ रखने का निर्देश दिया है ताकि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र के गरीब एवं जरूरतमंद व्यक्तियों को समय पर समुचित इलाज की सुविधा आसानी से उपलब्ध हो जाय। उन्होंने स्पष्ट किया है कि अस्पतालों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण एवं प्रभावी निगरानी लगातार जारी रहेगी तथा किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी एवं दोषी के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

उन्होंने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था को मजबूत रखें तथा यह सुनिश्चित करें कि किसी भी स्थिति में डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मी अनुपस्थित न रहें। विशेष रूप से एईएस जैसे संवेदनशील रोग को ध्यान में रखते हुए सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) एवं जिला अस्पताल में पर्याप्त संख्या में चिकित्सक एवं स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित रहे तथा आम जनता को कोई परेशानी न हो।
उन्होंने कहा कि एईएस से प्रभावित बच्चों के इलाज में किसी प्रकार की देरी न करें और सभी डॉक्टर एवं स्वास्थ्यकर्मियों को सक्रिय एवं तत्पर रहकर बच्चों को तुरंत अटेंड करने तथा त्वरित एवं प्रभावी इलाज की सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आवश्यक दवाओं, उपकरणों एवं एम्बुलेंस सेवाओं को भी पूरी तरह क्रियाशील रखने पर बल दिया गया है।
जिलाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे अपने क्षेत्र में जागरूकता अभियान भी चलाएं, ताकि आम जनता को एईएस के लक्षण, बचाव एवं समय पर उपचार के महत्व की जानकारी मिल सके। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने और आंगनबाड़ी सेविकाओं, आशा कार्यकर्ताओं एवं अन्य स्वास्थ्य स्वयंसेवकों को भी इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल करने को कहा गया है। साथ ही जो पहले से एईएस के मरीज हैं उन सभी पर विशेष निगरानी रखी जाए, क्योंकि ऐसा देखा जा रहा है कि वैसे मरीज भी अक्सर पुन: ग्रसित हो कर आते है।

जिलाधिकारी ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहें। यदि किसी बच्चे में तेज बुखार, उल्टी, बेहोशी या झटके जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराएं और किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतें।

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