May 8, 2026

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शिक्षा जगत में क्रांति ला रहा ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ ▪️प्रदेश की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी बनी मिसाल

शिक्षा जगत में क्रांति ला रहा ‘टीचर्स ऑफ बिहार’
▪️प्रदेश की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी बनी मिसाल

पटना। बिहार की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव और शिक्षकों के कौशल विकास को लेकर ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ एक सशक्त मंच के रूप में उभरा है। वर्तमान में यह प्रदेश की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी बन चुकी है, जहाँ हजारों शिक्षक तकनीक और नवाचार के माध्यम से एक-दूसरे से सीख रहे हैं।

*तकनीक से सुदृढ़ हो रही शिक्षा: संस्थापक व तकनीकी टीम*
समूह के संस्थापक शिव कुमार एवं टेक्निकल टीम लीडर ई. शिवेंद्र प्रकाश सुमन ने संयुक्त रूप से कहा कि, “हमारा मुख्य उद्देश्य बिहार के शिक्षकों को डिजिटल युग की चुनौतियों के लिए तैयार करना है। ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ केवल एक समूह नहीं, बल्कि एक विजन है जहाँ हर शिक्षक को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और नई शिक्षण विधियों को सीखने का समान अवसर मिल रहा है। हम तकनीक के माध्यम से शिक्षा को अंतिम पायदान पर खड़े छात्र तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

*मीडिया और सूचना का सशक्त माध्यम*
संगठन की पहुँच और इसके कार्यों को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में प्रदेश प्रवक्ता रंजेश कुमार , प्रदेश मीडिया संयोजक मृत्युंजय कुमार एवं तिरहुत प्रमंडलीय मीडिया प्रभारी मो० नसीम अख्तर ने संयुक्त रूप से कहा, “आज के समय में सूचनाओं का सही और त्वरित आदान-प्रदान बहुत आवश्यक है। ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ न केवल शिक्षकों की समस्याओं को रचनात्मक मंच प्रदान करता है, बल्कि बिहार के सरकारी स्कूलों में हो रहे बेहतरीन कार्यों को दुनिया के सामने ‘सकारात्मक बिहार’ के रूप में पेश भी कर रहा है। हमारी टीम निरंतर धरातल पर शिक्षकों की आवाज़ बन रही है।”

*आयोजन और नवाचार की नई राह*
संगठन द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों पर प्रकाश डालते हुए इवेंट लीडर केशव कुमार ने बताया कि, “हम समय-समय पर राज्य स्तरीय वेबिनार, कार्यशालाएं और नवाचारी गतिविधियों का आयोजन करते हैं। इन आयोजनों का उद्देश्य शिक्षकों के भीतर छिपे नेतृत्व गुणों को उभारना और उन्हें शिक्षण के आधुनिक तौर-तरीकों से परिचित कराना है। आने वाले दिनों में हम कई और बड़े शैक्षणिक कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार कर रहे हैं।”

‘टीचर्स ऑफ बिहार’ की मुख्य विशेषताएं:
▪️प्रोफेशनल नेटवर्किंग: बिहार के 38 जिलों के शिक्षकों का एक मंच पर जुड़ाव।
▪️स्किल डेवलपमेंट: आईसीटी और टीएलएम निर्माण में शिक्षकों को दक्ष बनाना
▪️सकारात्मक पत्रकारिता: स्कूलों की सफलता की कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार।
▪️डिजिटल लाइब्रेरी: शिक्षकों के लिए ई-कंटेंट और शिक्षण सामग्री की उपलब्धता।

आज ‘टीचर्स ऑफ बिहार’ अपनी सक्रियता और रचनात्मकता के कारण न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। इस मंच ने यह साबित कर दिया है कि यदि शिक्षक ठान लें, तो सरकारी विद्यालयों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदली जा सकती है।

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