वैशाली में ‘इंसाफ का मेला’: लोक अदालत बनी प्यार-भाईचारे की मिसाल, एक दिन में निपटे 1504 केस
वैशाली में ‘इंसाफ का मेला’: लोक अदालत बनी प्यार-भाईचारे की मिसाल, एक दिन में निपटे 1504 केस, 3.77 करोड़ का सेटलमेंट
रिपोर्ट :नसीम रब्बानी, बिहार
वैशाली में शनिवार को लगा इंसाफ का सबसे बड़ा मेला – राष्ट्रीय लोक अदालत। जहाँ मुकदमे नहीं, दिल जुड़ते हैं। प्रधान जिला जज हर्षित सिंह ने कहा – “लोक अदालत प्यार का प्रतीक है, यहाँ दुश्मनी खत्म होती है, भाईचारा बढ़ता है।” एक ही दिन में 1504 मामलों का निपटारा हुआ और 3 करोड़ 77 लाख रुपये का सेटलमेंट हुआ। तस्वीरें देखिए…
हाजीपुर/वैशाली, 09 मई 2026:अदालत की ऊंची दीवारों के बीच जब ‘इंसाफ’ और ‘इंसानियत’ हाथ मिलाते हैं, तो उसे कहते हैं – लोक अदालत। शनिवार को सिविल कोर्ट परिसर, हाजीपुर में कुछ ऐसा ही नजारा था। राष्ट्रीय लोक अदालत ने साबित कर दिया कि मुकदमों का अंत तारीख पर तारीख से नहीं, बल्कि प्यार और आपसी समझौते से होता है।
उद्घाटन करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश हर्षित सिंह ने कहा, _”लोक अदालत प्यार का प्रतीक है। यहाँ मुकदमे का अंतिम समाधान होता है, वो भी भाईचारे से। इससे समाज में अमन-चैन का माहौल बनता है।”_
इस मेगा इंसाफ मेले का संयुक्त उद्घाटन जिला जज हर्षित सिंह, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश ऋषि कुमार सिंह, जिला जज मनोज कुमार तिवारी, एसपी विक्रम सिहाग, एडीएम संजय कुमार, सचिव रितु कुमारी, बार अध्यक्ष चंडी लाल दास और सामाजिक कार्यकर्ता सुधीर कुमार शुक्ला ने किया।
एसपी विक्रम सिहाग ने कहा कि पुलिस प्रशासन लोक अदालत को कामयाब बनाने के लिए हर संभव मदद कर रहा है। वहीं बार अध्यक्ष चंडी लाल दास बोले, _”ये जिला विधिक सेवा प्राधिकार की शानदार पहल है। आम लोगों को बड़ी राहत मिल रही है और केस फटाफट निपट रहे हैं।”_
सचिव रितु कुमारी ने बताया कि सुनवाई के लिए 33 बेंच बनाई गईं थीं, जिनमें 10 बेंच सिर्फ ट्रैफिक चालान के लिए थीं। कुल 76,202 मामले सुनवाई के लिए रखे गए।
1504 केस का मौके पर निपटारा – 932 प्री-लिटिगेशन और 572 कोर्ट में लंबित केस। 3 करोड़ 77 लाख 64 हजार 559 रुपये का सेटलमेंट हुआ। ट्रैफिक चालान के 317 मामलों में 7 लाख 86 हजार 270 रुपये जुर्माना वसूला गया।
लोक अदालत के साथ-साथ कोर्ट परिसर में मेगा हेल्थ कैंप भी लगा। हजारों लोगों की हड्डी, ब्लड प्रेशर और शुगर की मुफ्त जांच की गई।
एन आर इंडिया न्यूज़ का विश्लेषण: जहाँ सालों-साल केस चलते हैं, वहीं लोक अदालत ने एक दिन में 1500+ परिवारों को ‘तारीख’ के दर्द से आजादी दिलाई। ये है असली न्याय।
