कोरोना महामारी बीमारी को देखते हुए राज्य से लेकर पूरे भारत मे लॉक डाउन लगा तो दिया जाता है।
सबसे ज्यादा असर पत्रकारो पर पड़ता है क्या इन पत्रकारों के लिए सोचने वाले कोई है कि नही।
लेकिन क्यों लोकडौन लगाने से आम जनता पर क्या असर पड़ता है। इसके लिए राज्य सरकार से लेकर भारत सरकार ने कभी सोचा है क्या?
सनोवर खान ब्यूरो रिपोर्ट पटना के साथ सुजीत कुमार कि रिपोर्ट
पटना:सरकार मस्त जनता पस्त। कोरोना महामारी बीमारी को देखते हुए राज्य से लेकर पूरे भारत मे लॉक डाउन लगाने से सबसे ज्यादा गरीबो, मजदूरो , दैनिक वर्कर, पत्रकार पर बूढ़ा असर पड़ता है। लेकिन इन सबो से सरकार को क्या लेना देना क्यों कि सरकार के अंतर्गत विधायक ,मंत्री आयोग के अध्यक्ष सदस्य एवं अन्य सरकारी आयोग के कर्मचारी ,सरकारी कर्मचारी को वेतन फिक्स,के साथ साथ आवास का भी सुविधा मुहैया कराया जाता है। और सरकार के अंतर्गत सरकारी कर्मचारी को भी कोई फर्क नही पड़ता। क्यों कि उन सरकारी कर्मचारी को वेतन ससमय सरकार के द्वारा दे दिया जाता है। लेकिन क्या ये सब सुबिधा आम जनों को मिल सकता है क्या। व्यवसाय पर कोई असर नही पड़ता, क्यों कि जिनको घर का जो दैनिक खान पान की चीज है वो सरकारी कर्मचारी अपने घरों में इकट्ठा कर लेते है।लेकिन मजदूर ,दैनिक मजदूर,पत्रकारो का क्या?
कोरोना वायरस बीमारी( कोविद- 19) को देखते हुए राज्य से लेकर पूरे भारत मे लॉक डाउन लगा तो दिया जाता है। कोरोनावायरस बीमारी (कोविड-19) एक संक्रामक बीमारी है जो SARS-CoV-2 वायरस की वजह से फैलती है. कोविड-19 की चपेट में आए ज़्यादातर लोगों को हल्के से लेकर मध्यम लक्षण महसूस होंगे और वे बिना किसी खास इलाज के बीमारी से ठीक हो जाएंगे. हालांकि, कुछ लोग गंभीर रूप से बीमार पड़ेंगे और उनको डॉक्टर से इलाज कराने की ज़रूरत होगी। लॉकडाउन क्या है, यह क्यों किया जाता है?
देशभर में लॉकडाउन कोरोना के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए किया गया है कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन लगाया जाता है। कोरोना वायरस के चलते पूरे देश में लॉकडाउन का दौर शुरू हो चुका है। लॉकडाउन होने पर आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर दूसरी सभी सेवा पर रोक लगा दी जाती है.