मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना एक दिखावा। सात निश्चय योजना सिर्फ कागजों पर।
मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना एक दिखावा।
सात निश्चय योजना सिर्फ कागजों पर।
बिस साल बीत जाने के बाद भी गंगा बिहार कॉलोनी वार्ड नो0 22 ए रो रहा है अपनी बदहाली पर।

गंगा बिहार कॉलोनी वार्ड नो0 22 ए की जनता नर्क के सामान जिंदगी व्यतीत कर रहे है।
सनोवर खान ब्यूरो रिपोर्ट पटना के साथ राजा कुमार पूट्टू की रिपोर्ट
पटना: दीघा विधानसभा क्षेत्र के पाटलिपुत्र नगर निगम अंचल अंतर्गत वार्ड नंबर 22 ए गंगा विहार कॉलोनी रोड नंबर 2 के मोहल्ला वासी रोड गली, नाला के अभाव में नरकीये जिंदगी जीवन व्यतीत कर रहे हैं। बिस साल बीत जाने के बाद भी गंगा बिहार कॉलोनी वार्ड नो0 22 ए रो रहा है अपनी बदहाली पर। मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना एक दिखावा। जहां लोगों को बीमारी की स्थिति में आवागमन के लिए दुकान कार्यालय एवं अन्य कार्य के लिए लोगों को आने जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है नाला नहीं होने के वजह से पानी निकासी नहीं हो पाता है जिससे आसपास के पड़ोस को जलजमाव एवं बीमारी उत्पन्न होने का डर लगा रहता है नगर निगम क्षेत्र होने के बाद भी पाटलिपुत्र नगर निगम मुख्य दर्शक बनकर बैठी है। जहां माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा कहा जाता है पटना महानगर कोई स्मार्ट सिटी बनाने के बाद कही जाती है लेकिन दूसरी ओर मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के नाम पर लूट बंद कर बन बैठा है ऐसा ही एक ताजा मामला दीघा विधानसभा क्षेत्र के पाटलिपुत्र नगर निगम अंचल अंतर्गत गंगा विहार कॉलोनी वार्ड नंबर 22 ए का है।यहाँ की जनता का कहना है कि हमलोग यहाँ 20 सालों से रह रहे हैं लेकिन हमारे वार्ड में कोई भी ऐसा विकास का कार्य नहीं किया गया है नहीं मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना के तहत जल घर नली सड़क योजना का कार्य किया गया है ऐसा प्रतीत होता है कि मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना एक दिखावा बनकर रह गया है। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि गंगा विहार कॉलोनी से सटे अटल पथ पुल का निर्माण तो किया गया है लेकिन पाटलिपुत्र अंचल पटना नगर निगम अंतर्गत वार्ड नंबर 22 ए की ओर किसी का ध्यान आज तक गया ही नहीं या फिर विकास के नाम पर जनता के साथ किया जा रहा मजाक। लेकिन कुछ दिनों बाद निगम पार्षद का चुनाव भी होने वाला है।
यहां कई पार्षद ,मेयर चुनाव जीतकर आ जाते है लेकिन उन गलियों का जीर्णोद्घार आज तक नहीं हो पाया। वजह चाहे जो भी हो। चाहे जनप्रतिनिधियों की नाकामी कहे, चाहे शासन प्रशासन की अनदेखी। लेकिन इनकी वजह से लोगों को समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। जबकि निगम पार्षद को वार्ड के विकास के लिए राशि दिए जाते हैं विकास की राशि कब और किस मद में खर्च किए जाते हैं। जो 20 सालों के बाद भी अब तक रोड का निर्माण नहीं हो पाया और ना ही जल निकासी का निर्माण किया गया
