आर एन सिंह मोड़ राजेंद्रनगर पुल के नीचे यातायात अधिकारी विजय कुमार सिंह के द्वारा किया गया अभद्र व्यवहार और देते है देख लेने की धमकी।
यातायात ! यातायात!!यातायात!!!
ट्राफीक यातायात पटना रहता है हमेशा शुर्खियो में।
आर एन सिंह मोड़ राजेंद्रनगर पुल के नीचे यातायात अधिकारी विजय कुमार सिंह के द्वारा किया गया अभद्र व्यवहार और देते है देख लेने की धमकी।
आर एन सिंह मोड़ राजेंद्रनगर पुल के नीचे यातायात अधिकारी विजय कुमार सिंह और शैलेश झा, कटबीघाहिया ट्रैफिक पोस्ट यातायात अधिकारी महेंद्र कुमार का वाहन मालिक के प्रति अभद्र व्यवहार। जब पत्रकारों के द्वारा आर एन सिंह मोड़ राजेंद्रनगर पुल के नीचे यातायात अधिकारी विजय कुमार सिंह से पत्रकारो द्वारा पूछा गया की यातायात का काम क्या है शहर को जाम से मुक्ति दिलाना तो आप लोग रोड के साइड में वाहन को लगाकर वाहन चेकिंग के नाम पर अवैध पैसे की वसूली क्यों करते हैं या फिर जाम की स्थिति क्यों पैदा करते हैं तो आर एन सिंह मोड़ राजेंद्रनगर पुल के नीचे यातायात अधिकारी विजय कुमार सिंह के द्वारा पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार किया गया। आपको जो करना है कीजिये ऐसे भी मैं मीठापुर से आया हु आप जैसे कितने लोगों को मैंने मीठापुर में देखा हु।
पटना जिले के ट्राफीक यातायात जाम की स्थिति को देखते हुए पिछले दिनों आलाअधिकारी द्वारा पूरे पटना के यातायात अधिकारियों को तबादला कर दिया गया था। लेकिन होना क्या है यातायात पोस्ट अधिकारी हमेशा की तरह सुर्खियों में रहते है। भारी संख्या में यातायात अधिकारी और सिपाही के तबादले के बाद भी
पटना ट्रैफिक पोस्ट पर यातायात वाहन चेकिंग बना हुआ है अवैध वसूली का अड्डा।
पटना:पटना बाईपास जिरो माइल, बाइपास धनकी यातायात पदाधिकारी ,गायघाट पुल के नीचे यातायात अधिकारी चौधरी जी ,आर एन सिंह मोड़ राजेंद्रनगर पुल के नीचे यातायात अधिकारी विजय कुमार सिंह और शैलेश झा, कटबीघाहिया
ट्रैफिक पोस्ट यातायात अधिकारी महेंद्र कुमार , हाइकोर्ट ट्राफीक पोस्ट, बोरींग रोड ट्राफीक पोस्ट रमेश यादव ,तपस्या पोस्ट अधिकारी इम्तियाज़ अहमद, इन सभी पोस्टो पर बना अवैध बसूली का अड्डा। सबसे बड़ी बात यह है कि अगर रोड के अगर बगल ट्रक, ट्रैक्टर,मोटरवाहन यह कोई भी अन्य वाहन रोड के किनारे लगे रहते है तो यातायात संचालन का कार्य किया है। लगें रहने देना यह फिर वाहन मालिक का स्पोट करना।
यातायात संचालन मुख्य दर्शक बन कर बन बैठी है।
सबसे बड़ी बात यह है कि धनकी मोड बाइपास के पास अवैध रूप से वाहन ट्रक नो पार्किंग में लगा रहता है। लेकिन आला अधिकारी का ध्यान अब तक ध्यान क्यों नही हाँ ये कोई नया बात नही है। सब पैसों का माया है। यातायात अधिकारी गाड़ी पकड़ने के ड्राइविंग लाइसेंस एबं कागजात की करते है मांग। कागज नही दिखाने पर और चालान का लोड दे दिया जाता है। ताकि कुछ बसूली हो सके।
यातायत अधिकरी ब्रगेश सिंह की भी अपनी मनमानी। ना कोई बोलने वाला ना को सुनने वाला। इस लिए अधिकारी कर रहे है अपने मन की काम। ब्रगेश सिंह जैसे भ्रस्ट अधिकारी को संपत्ति की जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए। सूत्रों के अनुसार हाई कोर्ट ट्राफीक पोस्ट के अधिकारी ब्रगेश सिंह आला अधिकारी के करीबी माने जाते है इसलिए करते है अपनी मनमानी।पटना बाईपास जिरो माइल, बाइपास धनकी यातायात पदाधिकारी ,गायघाट पुल के नीचे यातायात अधिकारी चौधरी जी ,यातायात पोस्ट अधिकारी कुम्हरार,आर एन सिंह मोड़ राजेंद्रनगर पुल के नीचे यातायात अधिकारी विजय कुमार सिंह और शैलेश झा, कटबीघाहिया
ट्रैफिक पोस्ट यातायात अधिकारी महेंद्र कुमार , हाइकोर्ट ट्राफीक पोस्ट, बोरींग रोड ट्राफीक पोस्ट रमेश यादव ,तपस्या पोस्ट अधिकारी इम्तियाज़ अहमद,एवं अधिकारियों के सिपाहियों द्वारा
महिला / पुरुष के द्वारा काटा जाता है चालान। पैसे लेकर मशीन के नीचे हाथ से दवा कर रख लेते है यह फिर चुपके से पैसे पैंट के पैकेट में रख लेते है इन्ही सब मामलों को जब पत्रकार ने अपनी आंखों से देखा तो हाई कोर्ट यातायात अधिकारी ब्रजेश सिंह, आर एन सिंह मोड़ राजेन्द्र नगर पुल के नीचे यातायात अधिकारी विजय कुमार सिंह और शैलेश कुमार झा,बोरिंग रोड चौराहा रमेश कुमार यादव ,कटबिगहिया पोस्ट के अधिकारी महेंद्र प्रसाद ने बताने से किया इनकार। कहा कि आपको जो लिखना है लिख दीजिए। हमलोगों का कुछ भी नही हो सकता है ये ऐसा मामला कोई एक पोस्ट का नही है कितने ऐसे सारे पोस्ट है जिनका नाम उपरोक्त में दिया हुआ है। ईमानदार आला अधिकारी नहीं करते हैं कोई करवाई।
पटना शहर में लगातार कई महीनों से वाहनों की चेकिंग शुरू है। विशेष चेकिंग भी लगाया जाता है जिससे जुर्माने के तौर पर सरकारी खजाने में राजस्व की वृद्धि भी हुई थी यहां तक तो बात सही है लेकिन ट्राफिक पोस्ट अवैध वसूली का केंद्र भी बन गया है, इसकी जांच पड़ताल करने के लिए ऊपर से कोई अधिकारी नहीं देखते हैं। आला अधिकारी को अपने स्तर से जांच के दोषी अधिकारी के खिलाफ करवाई करनी चाहिए।जब पत्रकारों की टीम ने पटना शहर का मुआयना किया तो वाहन चालकों ने बताया कि हम लोग सेटिंग गेटिंग करके 1000 का चालान 500 सौ में फाइनल कर लेते हैं।
नाम नही बताने के शर्त पर एक आदमी ने बताया कि चालान सरकार के द्वारा बहुत ज्यादा कर दिया गया है इस लिए हमलोग 500 रूपीए 1000 रूपीए देकर छूट जाते है कौन जाएगा 5000 रूपीए से 10000 रूपीए फाइन देने।
जांच के नाम पर अधिकारी किसी को भी नहीं बख्शते है। यह धंधा लगभग 75% पोस्ट पर होते है। समाचार लिखे जाने पर कार्रवाई शून्य है। एक तरफ जहां नीतीश सरकार भ्रष्टाचार को रोकने के लिए जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है, आर्थिक अपराध इकाई के द्वारा लगातार वरिष्ठ अधिकारियों पर भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है उनकी संपत्ति को जप्त किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ प्रशासन के नाक के नीचे राजधानी में वसूली का खेल जारी है। मामला तब समझ में आता है जब वाहन चालक एक जगह नजराना देकर दूसरी जगह पकड़े जाते हैं तो उनको कहना पड़ता है की पिछला पोस्ट पर पैसा देकर आए हैं, दोनों अधिकारी फोन पर बात कर लेते हैं और मामले को दबा दिया जाता है, कभी-कभी वाहन मालिक को कई जगह नजराना देकर आगे का रास्ता तय करना पड़ता है जो कि कहीं से उचित नहीं है। इस पर वरीय पदाधिकारी को संज्ञान लेने की जरूरत है नहीं तो न्याय के साथ विकास और विश्वास माननीय मुख्यमंत्री का सपना साकार नहीं हो पाएगा।
कुछ चहेते ट्राफिक पदाधिकारी कार्यालय को खुश करके अपना काम आसानी से कर रहे हैं मनचाहा पोस्टिंग भी करवा लेते हैं, राजधानी में सबसे ज्यादा वाहन जुर्माना वसूलने वाले पदाधिकारी को शहर के किनारे ट्राफिक पोस्ट पर बहाल कर दिया जाता है। बीते कुछ दिन पहले यातायात पदाधिकारियों की शहर मे अदला बदली किया गया था ताकि पारदर्शिता बनी रहे, शहर को जाम से मुक्त कराया जा सके लेकिन उसका कुछ अधिक फायदा नजर नहीं आया। कुछ ट्राफिक पोस्ट को तोड़ा गया कुछ को जोड़ा गया लेकिन स्थिति जस की तस है।
