दोनों समुदाय के मुख्य पर्व एक साथ होने से समरसता का नजारा
दोनों समुदाय के मुख्य पर्व एक साथ होने से समरसता का नजारा
दोनों पर्वों पर दोनों समुदाय के बीच होगी आपसी समरसता का नजारा, पर्व को लेकर दोनों समुदायों में भक्ति और उत्साह परवान पर
महुआ, नवनीत कुमार
इस बार हरि शयनी एकादशी और ईद-उल-जोहा (बकरीद) एक दिन होने से दोनों समुदाय के बीच आपसी समरसता का नजारा दिखेगा। दोनों पर्व एक दिन पड़ने से दोनों समुदाय में भक्ति और उत्साह चरम पर है।
पर्व के पूर्व संध्या पर शनिवार को यहां बताया गया कि रविवार को हरिशयनी एकादशी होगा और इसी दिन ईद-उल-जोहा (बकरीद) का भी त्यौहार मनाया जाएगा। आचार्य कुशेश्वर चौधरी बताते हैं कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी को हरि शयनी एकादशी के रूप में जाना जाता है। यह हिंदू धर्म के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस दिन भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं और चतुर्मास शुरू हो जाता है। इस दिन श्रद्धालु निर्जला उपवास रख भगवान विष्णु की विशेष आराधना करते हैं। इस एकादशी को पूजा पाठ करने से विशेष फल प्राप्त होता है। इधर हाफिज तौकीर सैफी ने बताया कि रविवार 10 जुलाई को सुबह 7:30 बजे शाही मस्जिद पर बकरीद की नमाज अदा की जाएगी। बकरीद को लेकर मुस्लिम समुदाय में खासा उत्साह है। यह पर मुस्लिम समुदाय के लिए विशेष महत्व रखता है। दोनों समुदायों का विशेष पर्व एक दिन होने से आपसी समरसता, शहिष्णुता, अपनत्व, एकता और भाईचारा उभरेगा। दोनों समुदायों में पर्व को लेकर आपसी प्रेम और मिल्लत का नजारा दिख रही है। लोगों का कहना है कि पर्व त्यौहार हमें एक होने के साथ आपसी प्रेम, भाईचारा, एकता और सहिष्णुता को दर्शाते हैं। यहां बाजार में जब एक दुकान पर दोनों समुदाय के लोगों द्वारा एक साथ पर्व की खरीदारी की जाती है तो आपसी प्रेम का नजारा फूट पड़ता है। पर्व के पूर्व ही दोनों समुदाय में एक दूसरे को बधाई देने का सिलसिला भी यहां जारी है। यहां मृत्युंजय सिंह, अरुण सिंह, सत्येंद्र कुमार, श्रीभगवान चौधरी, आशा सिंह, अभिषेक, बड़ेलाल यादव, मो इम्तियाज, मो सद्दाम, मो सलाम, मो बबलू आदि ने बताया कि दोनों समुदाय का पर्व एक साथ होने से आपसी मिल्लत का नजारा होगा।
