“शक्ति रूपेण संस्थिता””—- “माँ कालरात्रि की प्राचीन मंदिर,
“शक्ति रूपेण संस्थिता””—- “माँ कालरात्रि की प्राचीन मंदिर,
आज होगी माँ कालरात्रि की पूजा-
नयागांव(सारण)
माँ कालरात्रि की प्राचीन मन्दिर सोनपुर प्रखंड अंतर्गत पटना छपरा मुख्य मार्ग पर डुमरी बुजुर्ग गांव में एक ऊंचे टीले पर स्थित है छपरा-पटना से करीब 40 किलोमीटर और नयागांव स्टेशन से पश्चिम सड़क मार्ग से करीब तीन किलोमीटर की दूरी पर छपरा पटना मुख्य मार्ग से दक्षिण डुमरी बुजुर्ग गांव में अवस्थित है।मही नदी के किनारे ऊँचे टीले पर माँ कालरात्रि की प्राचीन मंदिर अज्ञात एवं अनादिकाल से है इसमें माता की पिण्डी रूप जैसी मिट्टी की प्रतिमा स्थापित है।
“इतिहास– विभिन्न गर्न्थो एवं पौराणिक कथाओं में माँ कालरात्रि के विभिन्न नामों एवं प्राचीन मंदिर का उल्लेख किया गया है।ब्रह्मवैवर्त पुराण में इसका वर्णन निम्नप्रकार से किया गया है।
मार्कण्डेय पुराण में प्रथम कल्प में कालरात्रि भयंकारी का वर्णन किया गया है आश्विन मास के अमावस्या को भी महारात्रि कहा जाता है उस दिन माता कालरात्रि ने दैत्यों का संहार करती हुई महाप्रलय का दृश्य बना दिया था
वहीं दुर्गा सप्तमी में वर्णित रात्रि सूक्तम एवं प्रधानिक रहस्यम के अनुसार माँ कालरात्रि ही योग माया व योग निंद्रा है जिनका वर्णन श्रीमद्भागवत में भी किया गया है।
–मंदिर से जुड़ी आस्था–
भक्ति,आस्था एवं विश्वास की असीमित सत्ता को अपने मे समेटे हुए सारण जिले के नयागांव थाना क्षेत्र के डुमरी बुजुर्ग गांव में मही नदी के किनारे स्थित मां कालरात्रि मंदिर जहाँ क्षेत्र के श्रद्धालुओं के अलावे शारदीय नवरात्र में आश्विन शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को माँ कालरात्रि के दर्शन का विशेष महत्व है बिहार समेत कई राज्यों के सभी स्थानों से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं यहां तक कि कई राज्यों झारखंड,बंगाल तथा उतर प्रदेश के बलिया,इलाहाबाद,गोरखपुर, जौनपुर जिलों तक मे रहने वाले देवी कालरात्रि के दर्शन पूजन के लिये यहाँ आते है दिनो दिन माँ की ख्याति बढ़ती जा रही है और भक्तों की आने की संख्या भी बढ़ती जा रही है माता कालरात्रि का यह स्थान विश्व मे एक सिद्ध स्थान है जो भक्त प्रेमपूर्वक माँ की आराधना करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
माता को चुनरी,झूल और प्रसाद चढ़ाया जाता है।– वृजेशनन्द मिश्र,प्रधान पुजारी कालरात्रि मंदिर—
कालरात्रि मंदिर की प्राचीनता और महत्व को देखते हुये यहाँ भक्तों की भाड़ी भीड़ जुटती है माँ को 24मीटर कपड़ा का झूल,चुनरी एवं मिठाई प्रसाद चढ़ाया जाता है माता सबों की मनोकामना पूर्ण करती है।—
विजय सिंह–अध्यक्ष कालरात्रि मन्दिर– मन्दिर का इतिहास पांच सौ साल पुराना है जिसका वर्णन विभिन्न गर्न्थो पुस्तकों में किया है माता के दरबार मे जो भक्त सच्चे मन से माथा टेकते है उनकी हर मुरादे माता पूरी करती है।—
अमोद कुमार सिंह-सचिव कालरात्रि मंदिर —
दुर्गा पूजा में श्रद्धालुओं की अत्यधिक भीड़ और भावना को देखते हुये मंदिर पर प्रशासन एवं ग्रामीणों द्वारा विशेष सुरक्षा व्यवस्था का प्रबंधन किया जाता है साफ सफाई,बिजली एवं पेयजल की सुविधा हर वक्त उपलब्ध रहती है।देवी कालरात्रि की कृपा से सभी भक्तजनों की मनोकामनाये पूर्ण होती है माता किसी भी भक्त को खाली हाथ नहीं लौटने देती माँ की ऐसी महता है वहीं कालरात्रि मन्दिर परिसर में विवाह भवन का निर्माण कराया गया है दुर्गापूजा को देखते हुए मन्दिर परिसर में श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए उत्तम प्रबंध किया गया है साफ सफाई के साथ साथ चौबीस घंटे बिजली और पानी की व्यवस्था की गई है।
