ग्रामीण इलाकों के सभी छठ घाट खतरनाक
ग्रामीण इलाकों के सभी छठ घाट खतरनाक
ग्रामीण इलाकों में अर्धदान के लिए व्रतियों को होगी भारी परेशानी, गंदे पानी में खड़ा होकर करनी होगी सूर्य उपासना
महुआ, नवनीत कुमार
एक ओर महुआ नगर परिषद अंतर्गत वाया नदी के कुछ घाटों की साफ-सफाई तो कराई गई है। जिस पर व्रतियां महापर्व छठ का अनुष्ठान कर सकेंगे। जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के सभी छठ घाट खतरनाक और गंदे हैं। इस खतरनाक घाटों और गंदे जलाशयों में व्रतियों को खड़े होकर सूर्य उपासना करना मजबूरी होगा।
महुआ प्रखंड के ग्रामीण इलाका के जलाशय में महापर्व पर व्रतिया अर्थ का अनुष्ठान पूरा करेंगी। जबकि गांव के सभी पोखर, तालाब, पइन आदि के घाट खतरनाक के साथ उसके पानी काफी गंदे हैं। बुधवार को यहां कन्हौली पोखर को दिखाते हुए लोगों ने बताया कि इसके चारों घाट खतरनाक बने हैं। साथ ही ना तो साफ सफाई की गई है और ना ही गंदे पानी को चुना या ब्लीचिंग रखकर साफ करने की कोशिश की गई है। इसी गंदे पानी में छठ व्रती महापर्व का अनुष्ठान करेंगी। यहां उन्हें खतरों का सामना तो करना ही पड़ेगा। साथ ही गंदे जल में खड़ा होने से स्किन डिजीज और अंत प्रॉब्लम हो सकती है। यहां विभिन्न गावों से 3 हजार से अधिक व्रती आती हैं। यही स्थिति लक्ष्मीपुर, लक्ष्मीनारायणपुर, फुलवरिया, रसूलपुर मुबारक, सलखनी, हरपुर, गंगटी, मधौल आदि जलाशयों की है। ग्रामीणों का कहना है कि उनके छठ घाटों कि कोई साफ सफाई नहीं की गई है। वे लोग स्वयं घाटों की साफ सफाई कर रहे हैं।
