April 19, 2026

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ओला गिरने से पूरी तरह बर्बाद हो जाती है तंबाकू की फसल

इस समय बारिश के साथ ओला गिरने का रहता है डर, अगर ओला गिरा तो खैनी उत्पादक हो जाएंगे फटेहाल, ओला गिरने से पूरी तरह बर्बाद हो जाती है तंबाकू की फसल
महुआ, नवनीत कुमार
इस समय आकाश में बादल छाने और बूंदाबांदी होने से तंबाकू उत्पादकों के हाथ कलेजे पर हो गए हैं। भोर से ही बादल छा गए और आकाश लाल होने लगा जिससे तंबाकू उत्पादक सहम गए। इस समय बारिश के साथ ओले गिरने का डर उन्हें समाता है। अगर ओला गिरा तो वह न घर के रहेंगे और न घाट के।
तंबाकू उत्पादक किसानों ने बताया कि इस समय बारिश के साथ ओला गिरने का डर रहता है। अगर ओला गिरा तो खैनी की फसल तो पूरी तरह चौपट ही हो जाएगी। उन्होंने बताया कि ओला गिरने से खैनी के सारे पत्ते समाप्त हो जाते हैं और वह कोई लाइक नहीं रहता। इस समय आकाश में जब बादल छाते हैं तो उनके हाथ कलेजे पर हो जाते हैं। तंबाकू उत्पादक किसान रमेश प्रसाद सिंह, सुरेंद्र सिंह, मुसाफिर राय, रामस्नेही प्रसाद, हरेंद्र राय, वीरेंद्र सिंह, नरेश सिंह, कमलदेव सिंह, निरंजन सिंह आदि ने बताया कि इस बार मौसम अनुकूल होने के कारण खेतों में फसल लहलहा रही है। जिनके जिस लायक मेहनत है वैसी फसल खेतों में है। किसानों ने बताया कि तंबाकू की खेती में अधिक पूंजी तो लगती ही है मेहनत तो जरूरत से ज्यादा करनी पड़ती है। अधिकतर किसान महाजन से व्याज पर पूंजी लेकर तंबाकू की फसल लगाई है। वे उसे बेचकर कर्ज चुकता करेंगे और घर का कामकाज भी चलाएंगे। यहां विभिन्न गांवों में किसान नगदी फसल के रूप में तंबाकू की खेती करते हैं। कितने किसान तो अपने बेटियों के हाथ पीले करने के लिए तंबाकू की फसल नगदी रूप में लगाते हैं और इसे बेचकर अपनी बेटियों के हाथ पीले करते हैं। इस तंबाकू की खेती से उन्हें काफी उम्मीदें जुड़ी होती है। किसान बताते हैं कि ओला गिरता है तो तंबाकू के साथ अन्य फसलों की भी बर्बादी होती है।
सरैंसा खैनी उत्पादन नाम से प्रसिद्ध है महुआ क्षेत्र:
महुआ अनुमंडल का इलाका सरैसा खनिज उत्पादक के नाम से प्रसिद्ध है। यहां के खैनी की दूसरे प्रदेश में काफी मांग है। यहां के किसान बंडी किस्म के खैनी लगाते हैं। यह खैनी की मांग अधिक होती है। यहां की मिट्टी खैनी उत्पादन के लिए मशहूर है। महुआ के प्रेमराज, नारंगी सरसिकन, पकड़ी, फतेहपुर, सिंहराय, मधौल, चांदसराय, बकसामा, छौराही, रसूलपुर, गंगटी, जलालपुर, सेहान, कुशहर, अब्दुलपुर, बनारसीपुर के अलावा पातेपुर प्रखंड के विभिन्न गांवों में तंबाकू की खेती बड़े पैमाने पर किसानों ने की है।

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