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बिदुपुर बहुग्रामीय जलापूर्ति योजना की हुई शुरुआत, आर्सेनिक प्रभावित घरों में पहुंचा गंगा जल

बिदुपुर बहुग्रामीय जलापूर्ति योजना की हुई शुरुआत, आर्सेनिक प्रभावित घरों में पहुंचा गंगा जल

रिपोर्ट नसीम रब्बानी

पटना / 15 जून, 2023

माननीय उप मुख्यमंत्री, बिहार श्री तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा बिदुपुर बहुग्रामीय जलापूर्ति योजना का आज उद्घाटन किया गया। उनके कर-कमलों के द्वारा बिदुपुर, देसरी और हाजीपुर प्रखण्डों के 30 हजार से अधिक घरों में ‘नल का जल पहुँचना प्रारंभ हो गया। उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के माननीय मंत्री ललित कुमार यादव ने किया और इस अवसर पर विभाग के प्रधान सचिव संजीव हंस, अभियंता प्रमुख सह विशेष सचिव अशोक कुमार विशेष रूप से उपस्थित थें।

एक सौ उनहत्तर करोड़ एकसठ लाख रूपये की लागत से तैयार इस योजना में गंगा नदी से जल को जलशुद्धिकरण संयंत्र में लाया जाता है और जल शुद्धिकरण संरचना द्वारा शुद्ध कर 28 ग्राम पंचायतों के 159 वार्डों में रहने वाले सभी ग्रामीणों को साफ स्वच्छ गंगा जल पीने के लिए उपलब्ध कराया जाने लगा है।

वैशाली जिला के 28 पंचायतों के भूजल में आर्सेनिक की समस्या थी। भूजल में आर्सेनिक की अधिक मात्रा में उपलब्धता कई गंभीर बीमारियों का कारण बनती है। त्वचा रोग से शुरू होकर यह जानलेवा कैंसर रोग तक बीमार कर देती है। इसलिए बिहार सरकार ने तय किया कि विकसित बिहार का निश्चय स्वच्छ पेयजल के बिना पूरा नहीं हो सकता है।

साफ पानी की घर में उपलब्धता की समस्या को बिहार सरकार ने हर घर नल का ‘जल’ निश्चय की शुरूआत कर दूर किया। नवम्बर, 2016 में शुरूआत हुई इस योजना
ने बिहार के घरों में नल का जल की उपलब्धता को शिखर तक पहुँचा दिया। राज्य के सभी ग्रामीण वार्डो में नल से स्वच्छ जल पहुँच रहा है।

बिदुपुर बहुग्रामीय जलापूर्ति योजना में गंगा नदी से जल लेकर 28 ग्राम पंचायतों के 30 हजार घरों को रोजाना पीने का शुद्ध पेयजल देने की शुरूआत की गई। इस योजना के अंतर्गत गंगा से पानी को जलशुद्धिकरण संयंत्र में लाया जाता है। जहाँ प्री सेटलिंग टैंक में पानी को स्थिर छोड़कर उसमें घुली अशुद्धियों को साफ किया जाता है। इसके बाद स्थिर हुए पानी को कैसकेड एरेटर में लाकर उसमें आक्सीजन की मात्रा को बढ़ाया जाता है, ताकि पानी की अशुद्धियाँ दूर हो सके। फ्लैश मिक्सर में एलम की डोजिंग की जाती है और पानी में घुले अशुद्धियों को दूर करने के लिए क्लेरीफ्लोक्यूलेटर में लाया जाता है। इस संयंत्र में शुद्ध व हलके जल कण ऊपर आ जाते हैं और अशुद्ध व भारी जल कण नीचे चले जाते हैं। रेपिड ग्रैविटी फिल्टर से जलशुद्धिकरण की प्रक्रिया को अंतिम चरण तक पहुँचाया जाता है। नियंत्रित प्रवाह प्रणाली से फ्लोक्यूलेटेड पानी को साफ किया जाता है और क्लोरीनेशन करते हुए भूमिगत क्लीयर वाटर रिजरवायर में रखा जाता है। अब यह पानी आपूर्ति के लिए तैयार है। इसे मोटर पम्प की सहायता से मास्टर जल मीनार में पहुँचाया जाता है और यहाँ पानी हजारों मीटर दूर इंटरमीडियेट पम्पिंग जल मीनार पर पहुँच अलग-अलग 15 स्थानों पर बने जल मीनारों तक पहुँचता है और हर घर को पूरे दाब के साथ साफ-स्वच्छ गंगा जल पीने के लिए उपलब्ध कराता है।

बिहार सरकार ने संसाधनों का पूरा इस्तेमाल करते हुए आर्सेनिक प्रभावित सभी घरों को ‘नल का जल’ दिया है। जो घर छूट गये हैं, उन्हें भी इस योजना से जोड़ा जा रहा है। हर परिवार, हर घर को पीने का पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। स्काडा के माध्यम से जलापूर्ति की निगरानी की जा रही है और जल चौपाल द्वारा पानी के बेहतर उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है। टोल फ्री नम्बर से शिकायतें दूर की जा रही हैं और पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जल जांच प्रयोगशालाएं और फील्ड टेस्ट
किट उपलब्ध कराये जा रहे हैं।

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