बच्चों के सर्वांगीण विकास में नैतिक शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान – रविन्द्र कुमार रतन
बच्चों के सर्वांगीण विकास में नैतिक शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान – रविन्द्र कुमार रतन
हाजीपुर – सुभाष चौक स्थित स्वतंत्रता सेनानी सदन में छात्र छात्राओं के बीच ” शिक्षा में बाल साहित्य की भूमिका विषयक पर संबोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार रविन्द्र कुमार रतन ने कहा कि बच्चों के सर्वांगीण विकास में नैतिक शिक्षा का महत्वपूर्ण योगदान हैऔर नैतिक शिक्षा साहित्य बाल साहित्य का ही एक हिस्सा है ।रंगकर्मी एवं साहित्यकार डॉ सुधांशु कुमार चक्रवर्ती ने कहा कि कला शिक्षा को पाठ्यक्रम के साथ जोड़कर बच्चों के बीच शिक्षा देने से बच्चे विषय के शिक्षण के प्रति आकर्षित होते है और विषयगत अनुभव को दोस्तों में बांटते भी हैं। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय , बनारस की छात्रा सलोनी ने कहा कि बच्चों के बीच कहानी एवं कविता को आकर्षक बनाने के लिए रचनात्मक मॉडल के आधार पर गतिविधि के माध्यम से शिक्षण कार्य करने की आवश्यकता है। कवयित्री सरोज वाला सहाय ने कहा कि जिंदगी को स्वस्थ्य रूप से जीने के लिए बच्चों को शिक्षा ग्रहण करना बहुत जरूरी है। कार्यक्रम का संचालन रंगकर्मी एवं स्काउट एवं गाइड लीडर उमेश कुमार निराला ने किया ।कार्यक्रम के शुरुआती दौर में दीप प्रज्वलित के बाद दूरदर्शन गायिका रश्मि चौधरी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की । जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सी वी रमन विश्वविद्यालय के प्रो शिवानी ने की। इस अवसर पर छात्र अनमोल
कुमार ने डॉ सुधांशु कुमार चक्रवर्ती रचित बाल गीत ” सूरज के गांव में
पीपल के छांव में ,,,”,
तथा होली मिशन पटना की छात्रा श्रेया कुमारी ने रविन्द्र कुमार रतन की रचना बाल गीत ” रंग – बिरंगी पंखों वाली ,
क्या – क्या भाव दिखाती तितली ” एवं छात्रा आकृति ने राजस्थान की
मूल बंगला कवयित्री पूर्णिमा मित्रा की रचना ” ठुमक – ठुमक आता हाथी ” सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया।
कार्यक्रम के अंत में कविता मंचन में उत्कृष्ट बच्चों को पुरस्कृत किया गया।
