मृतक के घर पर पहुंचकर परिजनों को ढाढस लगा बंधाने वालों का लगा है ताता
मृतक के घर पर पहुंचकर परिजनों को ढाढस लगा बंधाने वालों का लगा है ताता
जंदाहा के चौसीमा गांव में बिजली करंट से पति पत्नी और मां की हुई थी मौत
महुआ। रेणु सिंह
महुआ अनुमंडल के जंदाहा थाना अंतर्गत चौसीमा गांव में रविवार को मातमी सन्नाटा पसरा था। यहां वृद्ध और बीमार बाला सिंह पथराई आंखों से सबको देख रहे थे। उनके सामने उनकी पूरी दुनिया ही उजड़ गई। इतनी बड़ी घटना कोबे देखकर वे जीना नहीं चाहते, लेकिन सामने दो पुत्र और एक पोती को देखकर दर्द छुपाए आगे की आस देख रहे हैं।
33 वर्षीय पुत्र धर्मेंद्र कुमार सुमन, 27 वर्षीया गर्भवती पुत्र वधू सुमन देवी और 55 वर्षीय पत्नी कुसुम देवी की की एक साथ हुई मौत से वह सुध बुध खो बैठे हैं। बाला सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे हैं। वे घर में 2 पुत्र पंकज कुमार व प्रवीण के साथ मृतक पुत्र की इकलौती पोलियो ग्रस्त मासूम 3 वर्षीय रिद्धि को देखकर कलेजा बांधते हैं। उन्हें तो अभी कुछ समझ में नहीं आ रहा है कि यह क्या हो गया। अभी दोनों पुत्र कुंवारे हैं। करंट लगने से घायल पंकज अस्पताल से घर आ गए हैं और उनका इलाज वही चल रहा है। घर पर मातमपुर्सी करने वालों का ताता लगा हुआ है। हृदय विदारक घटना से सभी मर्माहत हैं। आसपास के लोगों के अलावा सगे संबंधियों का पहुंचना जारी है। इतनी बड़ी घटना पर हर लोग सन्न है। इधर मृतक तीनों व्यक्तियों का दाह संस्कार कर दिया गया।
अपने दोनों भाइयों के साथ लक्ष्मणपुर हाट पर कपड़ा दुकान चलाते थे धर्मेंद्र:
धर्मेंद्र कुमार धीरज अपने दोनों भाई पंकज और प्रवीण के साथ बगल के चौक लक्ष्मणपुर हाट पर कपड़ा दुकान चला रहे थे और उसी से घर परिवार चलता था। घटना के बाद दुकान बंद है। इधर घर तो पूरी तरह खाली हो गया। अब आने वाले लोगों को कौन ख्याल रखेगा। घर को संभालने वाली बाला सिंह की पुत्र धर्मेंद्र कुमार धीरज के साथ पत्नी और पुत्र वधू का नहीं होना सबको मर्माहत कर दे रहा है। घर पर पहुंचने वाली महिलाएं तो सब कुछ खाली खाली देखकर कलेजा पिटती है। दरवाजे पर टूटकर गिरा करंट प्रवाहित एलटी तार एक परिवार को उजाड़ दिया। घटना पर विधायक लखींद्र कुमार रौशन भी मर्माहत हैं।
गांव में नहीं जला दो दिनों से चूल्हा:
जंदाहा के चौसीमा गांव में 2 दिनों से चूल्हा नहीं जला है। यहां हर कोई गम में डूबा है। गांव की महिलाएं तो अपने आंसू रोक नहीं पा रही हैं। इतनी बड़ी घटना हो जाने पर चूल्हा कैसे जलाएं। यह उन्हें समझ में नहीं आता। भरा पूरा परिवार को उजड़े देख गांव की महिलाएं आंसू नहीं रोक पा रही है। मातम पुरसी करने वाले मृतक के दरवाजे पर पहुंचते तो हैं लेकिन उन्हें कुछ कहने के लिए शब्द नहीं। 5 महीने की गर्भवती सुमन की मौत तो सबको दिला दे रहा है। जिस घर में 4 महीने बाद किलकारियां गूंजने वाली थी। वहां मातम छाया हुआ है।
