जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत को लेकर चारों ओर माताओं में भक्ति रही परवान पर
जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत को लेकर चारों ओर माताओं में भक्ति रही परवान पर
आज पूर्वाहन 10:40 पर पारण के साथ पर्व का करेंगी समापन
महुआ। रेणु सिंह
जीवित्पुत्रिका (जिउतिया) व्रत पर शुक्रवार को माताओं ने निर्जला उपवास रख कुश के जीमूतवाहन बनाकर पूजा की। साथ ही पुत्रों को काल कल्वित होने से बचने और दीर्घायु होने की कामना को लेकर पंडितों से चीलो सियारो की कथा सुनी। पूजन के बाद उन्होंने पुत्रों को दीर्घायु होने के साथ स्वस्थ और निरोग रहने की आशीर्वचन दिए।
महुआ के विभिन्न मंदिरों पर पंडितों से जीवित्पुत्रिका व्रत की कथा सुनने के लिए माताओं की भीड़ उमड़ी। पंडितों द्वारा उन्हें कुश के जीमूतवाहन बनाकर उनका विधिवत पूजन करवाया। इसके साथ ही पुत्रों को दीर्घायु होने वाली चीलो सियारो, राजा जीमूतवाहध और गरुड़ देव की अमर कथा सुनाई। आचार्य नंदकिशोर झा व रविंद्र मिश्रा ने बताया कि यह व्रत पुत्रों के लिए माताएं करती हैं। माताओं को रहते उनका पुत्र कभी काल कल्वित नहीं हो। हमेशा उनका गोद भरी रहे और पुत्र निरोग व स्वस्थ हो। इसको लेकर इस व्रत पर माताएं अखंड निर्जला उपवास रखती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि व्रत पर माताएं अपने पितरों को झींगनी के पत्ते पर विभिन्न प्रकार की भोजन उन्हें ओठगन के रूप में देती है।
ताकि उनकी कृपा दृष्टि बनी रहे। उन्होंने यह भी कहा कि जिंदा कॉम अपने पूर्वजों को नहीं भूलता। माताएं इस आश्विन पितृ पक्ष में अष्टमी को महा उपवास रख पूर्वजों को याद कर घर परिवार की रक्षा को लेकर उनका पूजन करती है। पर्व को लेकर चारों ओर भक्ति का माहौल कायम रहा। पंडितों के अनुसार शनिवार को पूर्वाहन 10:40 पर व्रत का पारण कर माताएं महा उपवास तोड़ेंगी।
