धूमधाम से मनाई गई मातादीन भंगी का जयंती समारोह
धूमधाम से मनाई गई मातादीन भंगी का जयंती समारोह
इतिहास के पन्नों पर कलम चलाने वाले इतिहासकारों ने नहीं दिया सम्मान।
रिपोर्ट :नसीम रब्बानी, वैशाली
सब लोग जानते हैं 1857 की आजादी की लड़ाई की बगावत करने की प्रेरणा मंगल पांडे को मातादीन जी से मिली। वरना पांडे जी जीवन भर अंग्रेजों की नौकरी करते रहते। लेकिन मातादीन जी को अछूत होने के नाते भुला दिया गया, लेकिन 1857 आंदोलन के सुत्रधार थे महानायक मातादीन भंगी। ये उक्त बातें अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ हाजीपुर नगर शाखा अध्यक्ष राजीव रावत के अध्यक्षता में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर मातादीन भंगी के तैलचित्र पर सामूहिक रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर माल्यार्पण किया गया। इस अवसर पर अपने संबोधन में अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ हाजीपुर नगर अध्यक्ष राजीव रावत ने कहा कि मातादीन भंगी जी का पूर्वज मेरठ के रहने वाले थे।रोजी-रोटी की तलाश में कोलकाता पहुंच गए ।जो उस समय ब्रिटिश भारत की राजधानी थी ।वैसे तो क्रांति की तारीख 31 मई निश्चित थी लेकिन 29 मार्च 1857 को विद्रोह हो गया ।क्योंकि वाक्य यह हो गया की बैरक छावनी में कारतूसओ की फैक्ट्री में काम करने वाले अधिकतर फौजी ब्राह्मण थे। मातादीन भंगी अछूत जातियों से थे । एक दिन मातादीन सैनिक छावनी पहुंचे ।प्यास लगने पर मंगल पांडे से पीने के लिए पानी मांगा जो मेरठ से ट्रांसफर होकर बैरकपुर आया था।
ऊंची जाति का बताने वाले मंगल पांडे ने पानी पिलाने से इनकार कर दिया। चिड़कर मातादीन बोले कैसा है तुम्हारा धर्म एक प्यासे को पानी पिलाने की इजाजत नहीं देता और गाय जिसे तुम माता कहते हो लेकिन गाय की चर्बी लगे कारतूसओ बंदूक से बहार दांतो से खींचते हो।
यह सुनकर सैनिक बौखला गए। विद्रोह उठा। और विद्रोह की चिंगारी ने सारे भारत में ज्वाला का रूप ले लिया ।विद्रोहियों पर चार्जसीट बनाई मैं ।सबसे पहले नाम मातादीन जी का था ।रिकॉर्ड्स में ब्रिटिश सरकार बनाम मातादीन भंगी था।
मातादीन को विद्रोह का सूत्र धार मानते हुए उस को ही 8 अप्रैल को बैरकपुर छावनी प्रांगण में ही फांसी दे दी गई। और कोर्ट मार्शल बाद में हुआ था।
भारतीय इतिहास में शायद यह पहला मामला होगा जिसमें कोर्ट मार्शल बाद में हुआ और फांसी पहले दे दी गई लेकिन ब्राह्मण इतिहासकारों ने घोटाला करके इतिहास लेखन में भेदभाव के चलते मातादीन भंगी का नाम ही हटा दिया गया। जैसा कि दूसरे दलित और बहू जनों के इतिहास को भी इसी तरह छुपाया गया है।
जबकि इंग्लैंड सरकार के पास सारा ब्यौरा सुरक्षित है
मा0 मातादीन भंगी को सादर नमन है। इस अवसर पर अरूण राम, दीपक राम, सिकंदर राम, अशोक राम, मुन्ना राम, उपेन्द्र राम, चन्द्रेश्वर राम, विक्रम कुमार राम लाल राम आदि अनेकों लोगों ने जयंती समारोह में शामिल होकर भाग लिया।
