आरक्षण का वर्गीकरण का विरोध करने से सम्पन्न दलितों के दोहरा चरित्र हुआ उजागर-ललन
आरक्षण का वर्गीकरण का विरोध करने से सम्पन्न दलितों के दोहरा चरित्र हुआ उजागर-ललन
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“आरक्षण एक पीढ़ी तक सीमित नही होना चाहिए,अगर एक पीढ़ी आरक्षण का लाभ लेकर उच्च स्तर प्राप्त कर चुका है वैसे पीढ़ी को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए।
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अनुसूचित जाति के भीतर समानता नहीं है,एक दूसरे से भेदभाव एवं आपस मे छूआ-छूत बरकरार है।
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डां अम्बेडकर ने सफाई पेशा से जुड़े लोगों के लिए विशेष व्यवस्था की बात कही थी!
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भारत के इतिहास मे पहली बार एक ऐतिहासिक महत्व के फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनुसूचित जाति, जन जाति वर्गीकरण का विरोध करने से सम्पन्न दलितों के दोहरा चरित्र उजागर हुआ है।
माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कोर्ट का भारत सरकार ने समर्थन किया भारत सरकार ने दलील दिया कि दलित जातियों के भीतर समानता नहीं है एक दूसरे से भेदभाव होता है साथ ही एक दूसरे के साथ छुआछूत भी बरकरार है। यह बातें आरक्षण के वर्गीकरण के संबंध में बैठक के दौरान राष्ट्रीय स्वच्छकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन राम ने कहा। अंबेडकर भवन में आयोजित बैठक की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन राम ने किया जबकि संचालन से सेना के जिला संयोजक राजीव रावत ने किया।
आगे श्री राम ने कहा की आरक्षण का लाभ कुछ प्रभावकारी जातियां एवं परिवार ताकि सीमित है। आरक्षण एक पीढ़ी तक सीमित नही होना चाहिए, अगर एक पीढ़ी आरक्षण से उच्च स्तर प्राप्त कर चुका हो वैसे पीढ़ी आरक्षण के हकदार नहीं होना चाहिए।
श्री ललन ने यह भी कहा की जिस प्रकार स्थिर तालाब का पानी में सड़न हो जाता है उसी प्रकार, आरक्षण स्थिर व सीमित होने से सामाजिक सड़न हो गया है जिसका सामाजिक इलाज जरूरी है। ताकि सब तक आरक्षण का लाभ पहुंचे और बाबा साहेब के सपनो का भारत बन सके। बाबा साहब अंबेडकर ने सफाई पेशा से जुड़े लोगों के लिए विशेष व्यवस्था विशेष देख रेख की बात कही थी। लेकिन आरक्षण का अपहरण कर कुछ चंद लोगों ने इसे अपनी जागीर समझ बैठे है। बैठक में सर्वसम्मति से भारत बन्द के एक दिन पहले पुरे स्वचछकार समाज बीस अगस्त को दीपोत्सव मनाने का प्रस्ताव पारित किए गए।सदस्यों ने देश के माननीय प्रधानमंत्री जी से अपनी ओर ध्यान आकृष्ट कराते हुए उक्त विषय पर पहल करने की मांग की।
इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वच्छकार सेना मेहतर पंचायत टोल के सरदार अरूण राम,उप सरदार दीपक राम, अशोक राम, मुन्ना राम, सिकन्दर कुमार, मनोज कुमार,अजय राय, रामलाल राम, सुरेन्द्र राम, चन्देश्वर राम आदि ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का स्वागत करते हुए समर्थन किया
