हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए काव्य गोष्टी व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन।
हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए काव्य गोष्टी व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन।
हिंदी पखवाड़ा अन्तर्गत दिग्घी खुर्द स्थित आदर्श चेतना सेवा संस्थान के बैनर तले हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए काव्य गोष्ठी व सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया । कार्यक्रम की अध्यक्षता युवा साहित्यकार विजय कुमार विनीत ने की जबकि संचालन शिक्षक उमेश कुमार प्रसाद सिंह ने किया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि हिंदी हमारी संस्कृति है ।भारत के अलावे विदेशों में भी हिंदी बोली जाती है । हिंदी को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए हमें कार्य करने की जरूरत है। हमारी मातृभाषा हिंदी हमारी सभ्यता और संस्कृति की पहचान है । हमें संकल्प लेने की जरूरत है कि अपने दैनिक जीवन में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग करें। काव्य गोष्ठी की शुरुआत बाल कवयित्री आकृति कुमारी द्वारा गिरिजा कुमार माथुर की
कविता एक डोर में सबको जो है बांधती वह हिंदी है काआवृत्ति पाठ से शुरू हुआ। वहीं अनमोल कुमार ने रामनरेश त्रिपाठी की कविता मन मोहनी प्रकृति की गोद में जो बसा है ,विजय कुमार की कविता तू जिंदा है ,तो जिंदगी के जीत में यकीन कर शंकर शैलेंद्र की कविता, उमेश तिवारी द्वारा हिंदी हमारी आन है हिंदी हमारी शान है अंकित शुक्ला की कविता, जगदीश ठाकुर द्वारा कवि गोपाल सिंह नेपाली की कविता दो वर्तमान का सत्य सरल, सुंदर भविष्य के सपने दो , उमेश कुमार निराला द्वारा भारतेंदु हरिश्चंद्र की कविता का आवृत्ति पाठ के साथ स्वरचित कविता बीते हुए खेल को भुलाया नहीं जाएगा, टूटी ही दोस्ती को फिर से जोड़ा जायेगा। अंत में अध्यक्षीय संबोधन के साथ विजय कुमार विनीत द्वारा केदारनाथ सिंह की कविता का आवृत्ति पाठ के साथ स्वरचित कविता नदी को केंद्र में रखकर तीन रचनाएं नदी गंगा और स्त्री, घर परिवार और नदी एवं नदी और जीवन रहस्य । ओ नदी गंगा ,तुम्हारे अविरल गतिमय जल में नहाकर की प्रस्तुति दी। दूसरे सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत उषा किरण निरीक्षक पदाधिकारी ,कृषि विभाग जीवन तो भईया एक रेल है, कभी पैसेंजर तो कभी मेल है । वहीं विजय कुमार गुप्ता द्वारा जिंदगी हर सफर है सुहाना ,यहां कल क्या होगा किसने जाना। शंभू साजन द्वारा नून रोटी खालअ बाकी तू जिंदगी बचा ल की प्रस्तुति हुई। कार्यक्रम के अंत में विजय कुमार गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
