April 18, 2026

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कालाजार द्वितीय चक्र के छिड़काव की तैयारी पूरी/रिपोर्ट नसीम रब्बानी

कालाजार द्वितीय चक्र के छिड़काव की तैयारी पूरी/रिपोर्ट नसीम रब्बानी

– 91 छिड़काव कर्मियों को किया गया प्रशिक्षित
– इस वर्ष अभी तक मिले हैं 70 मरीज

मुजफ्फरपुर। 12 जुलाई
कालाजार की बीमारी से बचाव के लिए 15 जुलाई से जिले के 16 प्रखंडों के 388 राजस्व गांवों में सिंथेटिक पाइरोथाइराइड के छिड़काव की शुरुआत होगी। इसके लिए सोमवार को सदर अस्पताल में सभी 91 एसएफडब्ल्यू को एसीएमओ डॉ एसपी सिंह एवं जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने प्रशिक्षण दिया। जिला वेक्टर जनित रोग नियंत्रण पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने बताया कि यह छिड़काव 66 दिनों का होगा। वहीं पहले जहां दिवालों पर छह फुट तक दवाओं का छिड़काव होता था अब वह पूरी दिवाल पर होगा सिर्फ छत को छोड़कर। जिले के डीसीएम और बीसीएम को यह निर्देश दिया गया है कि आशा से वह छिड़काव पूर्व की सूचना देगें। छिड़काव के लिए दलों का गठन किया गया है। एक दल में एक सीनियर फील्ड वर्कर और 5 फील्ड वर्कर रहेगें। इसके लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है और विशेष प्रिंटेड रजिस्टर में इसका लेखा जोखा भी क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं द्वारा रखा जायेगा । एसीएमओ डॉ सिंह ने बताया कि कार्यक्रम के पर्यवेक्षण हेतु जिला, प्रखण्ड एवं सामुदायिक स्तर पर दायित्वों का निर्धारण किया गया है । प्रखण्ड स्तर पर सीडीपीओ एवं महिला पर्यवेक्षिकाओं द्वारा पर्यवेक्षण हेतु आईसीडीएस के जिला कार्यक्रम पदाधिकारी को तथा जीविका को जागरूकता अभियान चला कर इस चक्र को सफल बनाया जाएगा।
गंभीर प्रयास की जरुरत
प्रशिक्षण के दौरान एसीएमओ डॉ एसपी सिंह ने कहा कि कालाजार का संपूर्ण उन्मूलन के मद्देनजर गंभीर प्रयास करना होगा। इसके लिए सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। वहीं डॉ सतीश कुमार ने कहा कि प्रखंड स्तर, पंचायत स्तर एवं वार्ड स्तर पर इसके लिए परिवारों को जागरूक करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आशा पहले से ही उन अपने क्षेत्र में लोगों को बताएगी कि अमुक दिन उनके यहां यह छिड़काव होगा।
इस वर्ष 70 मरीज
वेक्टर रोग नियंत्रण पदाधिकारी पुरुषोत्तम कुमार ने कहा कि अभी जिले में लगातार कालाजार मरीजों की संख्या में कमी देखी जा रही है। 2018 में विभिन्न प्रखंडों में 457 केस प्राप्त हुए जबकि 2019 में 281, 2020 में 182, 2021 में अभी तक 70 मरीज मिले हैं। जिसमें वीआइ,पीकेडीएल और को इंफेक्शन के भी मरीज शामिल हैं।

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