April 22, 2026

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उमस भरी गर्मी से बच्चों में एईएस का खतरा , बचाएं/रिपोर्ट नसीम रब्बानी

उमस भरी गर्मी से बच्चों में एईएस का खतरा , बचाएं/रिपोर्ट नसीम रब्बानी

– पानी की कमी होने पर ओआरएस घोल दें
– धूप में जाने से बच्चों को बचाएं

सीतामढ़ी। 16 जुलाई
तेज धूप और नमी के कारण आजकल मौसम काफी उमस भरा है। ऐसे में बच्चों में एईएस के लक्षण आसानी से घेर सकते हैं। हम सभी जानते हैं कि एईएस से बचाव उसकी जानकारी ही है। ऐसे में हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम बच्चों को धूप में खेलने के लिए बाहर नहीं जाने दें व बच्चों को रात में खाली पेट न सोनें दे। ये बातें एईएस से बचाव पर जिला भीबीडीसी पदाधिकारी डॉ रविन्द्र यादव कह रहे थे। उन्होंने कहा कि अभी के मौसम में बहुत आद्रता है जिसमें खेलने के समय बच्चों के शरीर से बहुत ज्यादा पसीना निकल जाता है। इससे हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ जाता है।

समय पर ले जाएं अस्पताल
डॉ रविन्द्र कुमार यादव ने कहा कि एईएस के लक्षण दिखते ही समय पर अस्पताल पहुंचाना बहुत आवश्यक है। लक्षण दिखते ही अपने क्षेत्र की आशा, सेविका, जीविका दीदी या जनप्रतिनिधि को तुरंत ही सूचना दें। उनके पास टैग वाहन और एम्बुलेंस का नंबर रहता है। उससे तुरंत ही नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। वहां चमकी के लिए दो बेड का अलग से वार्ड है। जिसमें एसओपी के अनुसार उपकरण, दवाइयां, चिकित्सक एवं पारामेडिकल स्टॉफ की उपस्थिति होती है। अगर बेहतर ईलाज की जरुरत पड़ती है तो एसकेएमसीएच भी भेजा जाता है। जिले में कुल 1172 टैगवाहन मौजूद है।

निर्जलीकरण से बच्चों को बचाएं
डॉ रविन्द्र यादव कहते हैं कि उमस भरी गर्मी में बच्चों को निर्जलीकरण से बचाएं। इसमें शरीर मे पानी की कमी हो जाती है। जिससे चमकी या बुखार आने की संभावना रहती है। शरीर मे निर्जलीकरण न हो इसके लिए ओआरएस का घोल भी दे सकते हैं। यह एईएस से बचाव में भी सहायक होगा।

एईएस पर काम की बातें
चमकी आने पर सांस की नली को खुला रखने के लिए रोगी को एक तरफ लिटाएं। ठुड्डी को उठाकर रखें और एक हाथ गाल के नीचे रख दें। शरीर की स्थिति को स्थिर रखने के लिए एक पैर मोड़ दें या तुरंत ही अपने आशा/जीविका दीदी/ आंगनबाड़ी सेविका से संपर्क करें तथा नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। किसी झोला छाप डॉक्टर या झाड़ फूंक में न पड़ें।

चमकी न हो इसके लिए क्या करें:-
-धूप में बच्चों को न खेलने दें
-रात में खाने में मीठा जरुर दें
-रात में खाना खिलाकर ही बच्चों को सुलाएं
-सुबह उठते ही बच्चों को उठाएं और देखें, बच्चा कहीं बेहोश या उसे चमकी तो नहीं
-सड़े, गले या अधपका फल न खाने दे
-नदी, पोखर या तालाब के किनारे बच्चों को न खेलने दें
-बेहोशी या चमकी दिखते ही तुरंत एम्बुलेंस या नजदीकी गाड़ी से अस्पताल ले जाएं

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