एक्यूप्रेशर चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए डा.प्रमोद कुशवाहा को मिला गोल्ड मेडल।
एक्यूप्रेशर चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए डा.प्रमोद कुशवाहा को मिला गोल्ड मेडल।
रिपोर्ट:- मोहन कुमार सिंह महुआ
32 वाॅं राष्ट्रीय एक्यूप्रेशर एक्यूपंक्चर सम्मेलन का आयोजन बिहार योग कालेज के तत्वावधान में अधिवेशन भवन पटना में किया गया। जिसका उद्घाटन बिहार विधानसभा अध्यक्ष नंदकिशोर यादव, सहकारिता विभाग सह पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग बिहार सरकार डाक्टर प्रेम कुमार, सभापति, प्राक्कलन समिति एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री, बिहार तारकिशोर प्रसाद , डाक्टर सर्वदेव प्रसाद गुप्ता, डाक्टर अजय प्रकाश आदि ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। जिसमें वैशाली जिला के सुप्रसिद्ध एक्यूप्रेशर चिकित्सक राम जानकी एक्यूप्रेशर चिकित्सा केंद्र के संचालक डॉक्टर प्रमोद कुशवाहा को एक्यूप्रेशर द्वारा गरीबों को निःशुल्क इलाज करने के लिए गोल्ड मेडल दिया गया। इस अवसर पर अनिमेष हेल्थ केयर एंड उपचार केन्द्र दिघवारा सारण के डाक्टर सुजीत कुमार गुप्ता,डॉक्टर बबन कुमार सिंह प्राकृतिक चिकित्सक बिहार राज्य सहसंयोजक सहरसा ने उन्हें शुभकामनाएं एवं बधाई दी।साथ ही अजय प्रकाश एवं सर्वदेव प्रसाद गुप्ता ने भी आभार व्यक्त किया जिन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में गरीब मरीजों का बहुत कम खर्च में इलाज करने का प्रयास किया है इससे चिकित्सक अपना समय भी देंगे एवं इलाज भी करेंगे। डाक्टर प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति भी एक्यूप्रेशर चिकित्सा पद्धति पर प्रतिदिन 20 मिनट समय देता है तो वह रोगी नहीं बनेगा यदि रोग से ग्रसित हैं तो रोग दूर होगा दर्द से संबंधित रोग में तत्काल लाभ देखा जाता है तथा डायबिटीज, ब्लडप्रेशर, कब्ज़, किडनी, हृदय रोग आदि में अभूतपूर्व सफलता मिलती है। मनुष्य अगर स्वस्थ हैं तो समाज समाज विकास करता है ,देश विकास करता है। स्वस्थ रहने हेतु जीवन शैली का सही होना आवश्यक है खान -पान,रहन- सहन सभी तरीके सही होना चाहिए। एक्यूप्रेशर पूर्ण रूप से प्राकृतिक है।इसे जीवन शैली बनाना चाहिए यह रोग का निदान, रोग से बचाव एवं रोग का सफल उपचार करने में सक्षम हैं। एक्यूप्रेशर चिकित्सा का कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है।इस मौके पर डॉ प्रमोद कुशवाहा,डॉ सुजीत कुमार गुप्ता,डा बबन कुमार सिंह, डा.रेश्मा गुप्ता,डा. खुश्बू कुमारी, डॉ रागनी कुमारी, डॉ शाम्भवी प्रकाश, डॉ प्रभात कुमार, डॉ बिणा प्रकाश, डा काजल कुमारी, डॉ अंजली कुमारी, डॉ सुधा तिवारी, डॉ सितल कुमारी, डॉ सेरिना मल्लिक , डॉ ऊषा कुमारी, डॉ दृष्टि सोलंकी, डॉ संगीता कुमारी, डॉ निशा सिंह, डॉ रागनी कुमारी, डॉ हिना परविन, डॉ मोनिका कुमारी, डॉ रुक्मिणी कुमारी, डॉ आसमां बानो, डॉ मनिष कुमार, डॉ गोपाल काजी, डॉ कुशल पाल सिंह, डा अभिषेक कुमार, डॉ उपेन्द्र सिंह, डॉ पिन्टु पटेल, डॉ रिना कुमारी, डॉ लाल नाथ दिक्षित, डॉ अवधेश पाण्डेय आदि के साथबिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल,नई दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, आसाम, हरियाणा आदि राज्यों एवं बांग्लादेश, नेपाल के हजारों चिकित्सक मौजूद थे।
