April 21, 2026

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सनोवर खान के साथ राजा कुमार पुट्टू की रिपोर्ट           रिश्तों का महत्व समझाती रचनाएं होती हैं कालजयी : डॉ शिवनारायण

सनोवर खान के साथ राजा कुमार पुट्टू की रिपोर्ट           रिश्तों का महत्व समझाती रचनाएं होती हैं कालजयी : डॉ शिवनारायण

” मां धरणी-पिता गगन ” पुस्तक का लोकार्पण संपन्न

सनोवर खान के साथ राजा कुमार पुट्टू की रिपोर्ट


पटना I अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच के तत्वावधान में रविवार को महेंद्रू स्थित व्योम सभागार में विभा रानी श्रीवास्तव द्वारा संपादित ” मां धरणी-पिता गगन ” पुस्तक का लोकार्पण साहित्यिक पत्रिका ” नई धारा ” के संपादक एवं चर्चित कवि डॉ शिवनारायण ने किया I
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि ये रचनाएं ग्राम से विश्वग्राम तक की यात्रा कराती हुई हर समाज के जीवन में रिश्तों का महत्व समझाती हैं।
‘माता-पिता दिवस’ पर ‘मां धरणी पिता गगन’ जैसी प्रेरक पुस्तक का संपादन-प्रकाशन बताता है कि तमाम भौतिक विकास के बावजूद सृष्टि में मां-पिता के प्रति भावनात्मक संबंध पर रचनाकारों के मन में सर्वाधिक सम्मान का भाव संरक्षित है।
भारत और अमेरिका के चुनिंदा लेखकों द्वारा मां-पिता के सम्मान में लिखी रचनाओं का यह अनूठा संकलन युगों तक देश-समाज को प्रेरित करता रहेगा I

मुख्य अतिथि जेपी विश्वविद्यालय, छपरा की विदुषी प्रो अनीता राकेश ने कहा कि सृजनात्मकता के सोपान पर अग्रसर होती कर्मठता का अकाट्य प्रमाण है पुस्तक ‘मां धरणी पिता गगन ‘ । धरती और आकाश के मध्य स्थित ऐहिकता का ताना-बाना जननी और जनक से ही निर्मित है I

लेख्य मंजूषा की अध्यक्ष और पुस्तक की सम्पादक विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा कि प्रत्येक मनुष्य के अंदर अनुभवों का अथाह जल है। अब वह जल भावाभिव्यक्ति में क्या स्वरूप पा लेता है, झरना, ताल, नदी, सागर या धरा में लिप्त आँसू, यह तो रचनाकारों के बुद्धिमत्ता पर ही निर्भर होगा।

अध्यक्षता करते हुए लघुकथा मंच के महासचिव डॉ ध्रुव कुमार करते हुए
वैसे तो मातृ -पितृ ऋण से कभी उऋण नहीं हो सकते किन्तु लेखनी के माध्यम से उनके प्रति प्यार ,सम्मान प्रदान कर उन्हें आनंदित तो किया ही जा सकता है। यह पुस्तक प्रत्येक माता-पिता के अंतस् में आनंद की श्रोतस्विनी प्रवाहित करेगी ऐसा मेरा विश्वास है।

इस अवसर पर प्रभात कुमार धवन, आलोक चोपड़ा, अनिल रश्मि, एकता कुमारी, पंकज प्रियम, ध्रुव कुमार, विभा रानी और ए आर हाशमी ने अपनी- अपनी लघुकथाएं और कविताओं का पाठ किया I
धन्यवाद ज्ञापन अनिल रश्मि ने किया I

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