बज्जिकाभाषा संयुक्त संघर्ष समिति की प्रमुख मांग बज्जिका भाषा के कोड का निर्धारण एवं इसे अष्टम अनुसूची में शामिल किया जाए ।
बज्जिकाभाषा संयुक्त संघर्ष समिति की प्रमुख मांग बज्जिका भाषा के कोड का निर्धारण एवं इसे अष्टम अनुसूची में शामिल किया जाए ।
भारत सरकार एवं बिहार सरकार के वज्जिकांचल क्षेत्र के सभी मंत्री, सांसद, विधायक ,तथा सम्बंधित अधिकारी पदाधिकारियों से विनम्र निवेदन है कि ”बज्जिकाभाषा की अकादमी का गठन कर इस भाषा को कोड निर्धारित कर उचित सम्मान दिलाने की व्यवस्था में अपना-अपना योगदान निर्धारित करने की ओर अग्रसर हो।
वैशाली विश्व का प्रथम गणराज्य रहा है । इस जनपद से उत्पन्न हो कर बज्जिका भाषा देश विदेश में अपना परचम लहरा रही है ।बज्जिका का अपना व्याकरण और समृद्ध शब्द – कोष है तब भी बज्जिका आज अपनो से ही हारी है बज्जिका भाषा संयुक्त संघर्ष समिति
के उपाध्यक्ष रबीन्द्र कुमार रतन, जिला अध्यक्ष मणी भूषण सिंह अकेला जी ,सरोज वाला सहाय ,
डा वीर मणि राय,हरिविलास राय एवं समन्वयक श्री अखौरी चन्द्र शेखर एवं सुधा वर्मा ,सचिव दीपक मुखियाआदि ने एक स्वरमें बज्जिका के विकास की जोड़ दार मांग की।
आज परमादरणीय डा 0 नवल किशोर प्रसाद श्रीवास्तव और ब्रह्म देव कार्यी, ज्वाला सांध्यपुष्प , आदरणीय हरि जीजैसे विद्वान बज्जिका भाषा का सपना सजोए युवासाहित्य कारों की ओर आशा भरी निगाहों से देख रहें हैं ।
रवीन्द्र कुमार रतन ने जोड़ देते हुए कहा कि हमें संकल्प लेना होगा कि हम बज्जिका में ही बोलेंगे, बज्जिका में ही लिखेंगे और बज्जिका में ही सुनेगें ।
श्री रतन ने आगे कहा कि जो भी बज्जिका भाषा को साथ देगा हम बज्जिका भाषी भी उसी के साथ रहेगे। हम अपने मातृ भाषा के विकास के लिये हर सम्भव प्रयास ही नही उसके मान सम्मान केलिए जी जान लगा देंगे ।
सर्व सम्मति से श्री रतनने बिहार के जुझारु एवं ऊर्जावान मुख्यमंत्री ,केंद्रीय राज्य मंत्री नित्यानंद राय जी , हाजीपुर के सांसद एवं केन्द्रीयमंत्री श्र चिराग पासवान, उपेन्द्र कुशवाहा जी एवं सभी सांसद,विधायक, विधान पार्षद का ध्यान इस ओरआकृस्ट करते हुए कहा कि जैसे अन्य मातृ भाषा मैथिली, भोजपुरी के प्रति उनके सकारत्मक विचार हैं वैसे ही बज्जिका भाषा के विकास में ये भी अपना प्यार ,दुलार दें और बज्जिका भाषा का कोड निर्धारित करा इसे अष्टम सूची में शामिल कराने की व्यवस्था करें ।
विद्यालयों में इसको प्राथमिकता के साथ स्थान दिलाने की कृपा करें ।
श्री रतन ने सर्व सम्मति से बिहार सरकार से विनम्रता के साथ
निवेदन किया कि बज्जिका भाषा की अकादमी का गठन कर इसभाषा को उचित सम्मान दिलाया जाय ।
उन्हो ने बज्जिका भाषियों को आह्वान करते हुए कहा कि बज्जिका के लिये लड़ो लडाई। लड़ नहीं सकते तो बज्जिका मे ही बोलो ।
बोल नहीं सकते तो बज्जिका में ही लिखो । लिख नहीं सकते तो साथ दो लडाई में । साथ नहीं दे सकते तो मनोवल ही बढ़ाओ। अगर वो भी नहीं कर सकते तो मनोवल को मत गिराव क्योंकि यह लडाई किसी एक आदमी की नहीं पुरे बज्जिका क्षेत्र की अस्मिता की लडाई है
यह बड़ा ही विचारणीय बात है कि बज्जिकंचल की मातृ भाषा बज्जिका को नेपाल सरकार ने सरकारी काम काज की भाषा के रुप मे मान्यता प्रदान कर दिया है वैशाली जनपद में उत्पन्न हो कर यह भाषा अपने ही क्षेत्र में आन- बान और शान तथा सम्मान और सरकारी काम काज में स्थापित होने की बाट जोह रही है ।
समाप्त
