सम्राट अशोक जयंती समारोह—‘जनकल्याण ही राजधर्म’ का उद्घोष, वर्तमान व्यवस्था पर प्रहार
सम्राट अशोक जयंती समारोह—‘जनकल्याण ही राजधर्म’ का उद्घोष, वर्तमान व्यवस्था पर प्रहार
_रिपोर्ट: सुधीर मालाकार_
सहदेई बुजुर्ग (वैशाली) — बालेश्वर सिंह सुदामा देवी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, अंधराबर चौक-पहाड़पुर तोई के सभागार में सम्राट अशोक जयंती पर भावपूर्ण आयोजन हुआ। अध्यक्षता निदेशक अधिवक्ता सुनील कुमार सिंह ने की। वक्ताओं ने कहा, *“अशोक का साम्राज्य अफ़ग़ानिस्तान, कंधार, गांधार तक विस्तृत था, पर शासक की आत्मा धम्म-नीति में बसती थी—जनकल्याण ही राजधर्म था, हर प्रजा को न्याय और गरिमा मिली।”* उन्होंने जोड़ा, *“आज नीति का दायरा सत्ता-समीकरणों में सिकुड़ गया है; याद रखना होगा कि सच्चा शासन प्रजा के सुख से मापा जाता है, कुर्सी के समीकरण से नहीं।”* सरस्वती वंदना के बाद सुरेश सिंह, दीपक शर्मा, डॉ वैद्यनाथ शर्मा, कविता शर्मा, सरिता कुमारी, कंचन-मंचन कुमारी, अंजू कुमारी, पुष्पलता, सुषमा झा, पूनम-सोनी-सुरभि कुमारी, विपीन कुमार, अनिल कुमार सिंह, पूर्व प्रधानाध्यापक भगवान प्रसाद साहू, प्राचार्य रघुनाथ प्रसाद सिंह, यादव वीणा भारती, अरुण कुमार, डॉ उमाशंकर निराला, दिनेश कुमार सिंह, जमील अख्तर, अरविंद कुमार अरुण आदि ने अशोक के धम्म-स्तंभों, शिलालेखों और युद्ध-परित्याग-बोधि की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
