BHISMCUBE के साथ एम्स पटना ने आपदा प्रबंधन को दी नई परिभाषा
BHISMCUBE के साथ एम्स पटना ने आपदा प्रबंधन को दी नई परिभाषा
फुलवारी शरीफ फातमा जहां की रिपोर्ट।
आपदाएं कभी सूचना देकर नहीं आती। वे आती हैं अचानक, अव्यवस्थित और चुनौती बनकर लेकिन 7 अप्रैल 2026 को एम्स पटना में इसी अनिश्चितता को एक नई भाषा मिली तैयारी की भाषा। सायरन की आवाज गूंजी और उसी क्षण, एक साधारण दिन असाधारण बन गया। 150 से अधिक प्रशिक्षित हाथ, डॉक्टर, नर्सिंग अधिकारी, फार्मासिस्ट, प्रशासनिक और आपातकालीन टीमें। एक ऐसी लय में सक्रिय हुए, जहां हर कदम पहले से तय था, हर निर्णय स्पष्ट था।
यह कोई अभ्यास भर नहीं था। यह उस क्षण की रिहर्सल थी जब असली आपदा सामने होती है।
इस पूरे संचालन का केंद्र था BHISMCUBE…एक ऐसा आधुनिक, मॉड्यूलर सिस्टम जो केवल 12 से 45 मिनट में किसी भी स्थान को एक पूर्ण आपातकालीन अस्पताल में बदल देता है। 72 RFID सक्षम यूनिट्स। हर एक अपनी भूमिका में सटीक। एक साथ जुड़कर एक ऐसी संरचना बनाते हैं, जहां समय सिर्फ बीतता नहीं, जीवन बचाता है। जब “गोल्डन आवर” की घड़ी चलती है, तब यही समन्वय जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर बनता है। मॉक ड्रिल के दौरान दृश्य बेहद जीवंत था। कुछ मरीज खुद चलकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचे, कुछ को तत्काल चिकित्सा सहायता दी गई और गंभीर मरीजों को तेजी से स्थिर कर उन्नत उपचार की ओर बढ़ाया गया। लेकिन इस दृश्य के पीछे भी एक और कहानी चल रही थी। एक अदृश्य व्यवस्था, जहां हर संसाधन, हर उपकरण, हर मदद बिल्कुल सही समय पर, सही स्थान पर पहुंच रही थी। यह केवल व्यवस्था नहीं थी, यह पूर्व-तैयारी की शक्ति थी।
इस पहल ने भविष्य की दिशा भी तय की। 15 स्वास्थ्यकर्मियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया गया जिससे अब कुल संख्या 25 हो गई है। एक ऐसा समूह जो आने वाले समय में और भी सैकड़ों प्रशिक्षित हाथों को तैयार करेगा।
यह कार्यक्रम कार्यकारी निदेशक प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनुप कुमार और प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (ट्रॉमा सर्जरी एवं क्रिटिकल केयर डॉ. अनिल कुमार) तथा नोडल अधिकारी BHISMCUBE की उपस्थिति में आयोजित हुआ जहां नेतृत्व और दृष्टि दोनों एक साथ दिखाई दिए। इस मौके पर प्रो. (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल ने कहा कि “यह केवल एक मॉक ड्रिल नहीं, बल्कि हमारी उस सोच का प्रतिबिंब है, जिसमें हम हर आपदा के लिए पहले से तैयार रहना चाहते हैं। BHISMCUBE इस दिशा में एक सशक्त और दूरदर्शी पहल है।”
डॉ. अनिल कुमार के नेतृत्व में यह अभ्यास एक स्पष्ट बदलाव को दर्शाता है जहां अब प्रतिक्रिया नहीं बल्कि पूर्व-प्रतिक्रिया (proactive readiness) ही असली ताकत है। जब सायरन की आवाज थमी
तो शांति के बीच एक संदेश और गूंजता रहा कि आपदाएं अनिश्चित हो सकती हैं लेकिन हमारी तैयारी नहीं।
एम्स पटना में अब तैयारी सिर्फ योजना नहीं यह एक जीवंत प्रणाली है, एक सतत अभ्यास है और हर चुनौती के सामने अडिग खड़े रहने का संकल्प है।
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